Madias Ngake Story viral in Commonwealth Games 2026: मैडियास न्गाके की कहानी खेल की दुनिया की सबसे अनोखी कहानियों में से एक है. कैमरून की इस वेटलिफ्टर को लंदन 2012 गेम्स का ओलंपिक मेडल 7 साल बाद मिला, दरअसल, उनसे आगे रहने वाले 3 एथलीट डोपिंग के कारण अयोग्य घोषित कर दिए गए थे. हालांकि, आधिकारिक तौर पर ओलंपिक मेडलिस्ट बनने के बावजूद, न्गाके ने असल में कभी अपना मेडल अपने हाथों में नहीं ले पाईं हैं.
सेक्सुअल पहचान बनी सबसे बड़ी चुनौती, जान बचाने के लिए छोड़ना पड़ा
लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने के बाद, न्गाके ने कैमरून न लौटने का फैसला किया. उन्हें अपनी सेक्सुअल पहचान की वजह से उत्पीड़न का डर था, इसलिए उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में ही रहने का बड़ा फैसला किया, जिसके कारण उनकी जिन्दगी पूरी तरह से बदल गई. यूके में उन्होंने बाद में अपनी जिन्दगी को नए सिरे से शुरू किया. नतीजतन, उन्हें सालों बाद जो मेडल मिला, वह कैमरून में ही रह गया और वह उसे कभी हासिल नहीं कर पाईं.
महीनों तक बिना घर, पैसे के रहना पड़ा, अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर मेडल
न्गाके का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. यूके में रहने के दौरान उन्हें महीनों तक बिना घर, पैसे या किसी सहारे के संघर्ष करना पड़ा. फिर भी, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना वेटलिफ्टिंग करियर जारी रखा. लंदन 2012 के 14 साल बाद, उन्होंने ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और 86 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर एक शानदार वापसी कर इतिहास रच दिया.
न्गाके, जो अब नॉटिंघम में रहती हैं, उन्होंने वहां रुकने का कोई प्लान नहीं बनाया था, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें जिन्दगी बदलने वाला ऐसा फैसला लेना पड़ेगा, जिसे वह उत्पीड़न से "सुरक्षा और आजादी" का एकमात्र जरिया मानती थीं.
BBC को दिए इंटरव्यू में नगाके कहती हैं, "2012 में मुकाबले खत्म होने के बाद वहां रुकना आसान नहीं था, लेकिन मुझे अपनी सुरक्षा और अपने भविष्य के लिए फैसला लेना ही था, क्योंकि मुझे दिख रहा था कि कैमरून में अब मेरा कोई भविष्य नहीं है. "मैं लेस्बियन हूं, मुझे महिलाओं से प्यार है और कैमरून में इसकी इजाजत नहीं है. मुझे यहां इसलिए रुकना पड़ा ताकि मेरा भविष्य और जिन्दगी अच्छी हो सके, और अगर मैं किसी महिला को अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहूं तो मुझे खुद को नुकसान न पहुंचाना पड़े"
उनकी कहानी सिर्फ ओलंपिक मेडल के बारे में नहीं है, यह हिम्मत, त्याग और आज़ादी की तलाश की कहानी है, जो साबित करती है कि कुछ जीतें मेडल से कहीं ज्यादा बड़ी होती हैं.
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