भारत ने आज अपनी आज़ादी के 80 साल पूरे कर लिए हैं. आजादी के बाद से भारत के खेलों की कहानी पूरी तरह से बदल गई है. भारत अब सिर्फ़ एक खेल पर निर्भर नहीं है. भारत ने कई खेलों में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है. जिसका ताजा उदाहरण ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स हैं, जिसमें भारतीय बॉक्सरों ने 7 गोल्ड जीते जबकि वेटलिफ्टिंग में भी मेडल की बारिश हुई. 1948 के लंदन ओलंपिक में पुरुषों की हॉकी टीम की जीत से लेकर 1983 में कपिल देव की शानदार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत तक, भारतीय एथलीट्स ने आजादी के बाद कई यादगार पल दिए हैं, जिसने देश में खेल के प्रति लोगों के जुनून को आकार दिया है.
1947 के बाद कई दशकों तक, भारत की ग्लोबल खेल पहचान मुख्य रूप से फील्ड हॉकी से ही बनी रही. आठ ओलंपिक गोल्ड, जिनमें छह लगातार 1928 से 1956 के बीच जीते गए थे, हॉकी सिर्फ़ एक खेल नहीं था, यह आज़ादी के बाद के गर्व और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक थी. यह विरासत आज भी कायम है, जिसे लगातार ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडल (टोक्यो और पेरिस) से और मजबूती मिली है.
ओलंपिक भारत की कुछ सबसे अहम कामयाबियों का मंच रहा है. 1952 में हेलसिंकी में, पहलवान के.डी. जाधव ने पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती कैटेगरी में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और आज़ादी के बाद भारत के लिए व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने.
चार साल बाद, मेलबर्न में, भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने—जिस खेल पर उनका दशकों से दबदबा था—पाकिस्तान को हराकर गोल्ड मेडल जीता. यह आज़ाद भारत के लिए हॉकी में पहला और देश के लिए लगातार छठा ओलंपिक गोल्ड मेडल था.
1996 में अटलांटा में, टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने पुरुषों के सिंगल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. वह ओलंपिक टेनिस मेडल जीतने वाले पहले एशियाई और आज तक ऐसा करने वाले एकमात्र भारतीय बने.
सिडनी 2000 में वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर इतिहास रचा था. वह ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं था.
बीजिंग 2008 एक बहुत अहम साल रहा. शूटर अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मेडल जीता, जो भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक गोल्ड मेडल था. उसी गेम्स में, रेसलर सुशील कुमार ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और बाद में लंदन 2012 में सिल्वर मेडल जीतकर दो व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने.
1975 का हॉकी वर्ल्ड कप एक और बड़ी उपलब्धि थी, जब भारत ने पहली बार यह खिताब जीता और अपनी शानदार हॉकी विरासत में एक नया अध्याय जोड़ा.
2021 में हुए 2020 टोक्यो ओलंपिक ने भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक पल बनाया, जब नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में एथलेटिक्स में देश का पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता. उनकी सफलता ने पूरे भारत में ट्रैक और फील्ड खेलों में नई दिलचस्पी जगाई.
पेरिस 2024 ओलंपिक में, शूटर मनु भाकर ने एक ही गेम्स में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनकर इतिहास रचा और भारत की ओलंपिक यात्रा में एक और यादगार अध्याय जोड़ा.
भारत की खेल उपलब्धियां ओलंपिक से कहीं आगे तक फैली हुई हैं. 1951 में, भारतीय फुटबॉल टीम ने नई दिल्ली में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता. एक साल बाद, 1952 में, भारत ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी पहली टेस्ट क्रिकेट जीत दर्ज की, जिससे देश के क्रिकेट पावरहाउस के रूप में उभरने की नींव पड़ी.
हॉकी में, भारत ने 1975 में कुआलालंपुर में अपना पहला और एकमात्र पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप खिताब जीता. पांच साल बाद, बैडमिंटन के दिग्गज प्रकाश पादुकोण 1980 में प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड ओपन जीतने वाले पहले भारतीय बने, जिससे खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी को प्रेरणा मिली.
चेस में भी 1988 में एक और अहम पल आया जब विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने. 1997 में, महेश भूपति ने जापान की रिका हिराकी के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स का खिताब जीतकर ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचा. 2024 में, डी गुकेश सबसे कम उम्र के FIDE वर्ल्ड चेस चैंपियन बने और दिग्गज आनंद के बाद यह खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय बने.
क्रिकेट ने भी भारत के खेल जगत के कुछ सबसे यादगार पल दिए हैं. 1983 में, कपिल देव की टीम ने लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज को हराकर भारत का पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता. जहां हॉकी ने भारत के खेल गौरव की नींव रखी, वहीं क्रिकेट ने वैश्विक स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ाया.
एमएस धोनी की कप्तानी में, भारत ने 2007 में दक्षिण अफ्रीका में पहला T20 वर्ल्ड कप, 2011 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ODI वर्ल्ड कप और 2013 में इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफी जीती. इन जीतों के साथ, धोनी ICC के तीनों बड़े व्हाइट-बॉल खिताब जीतने वाले एकमात्र कप्तान बने.
हाल ही में, भारत ने 2024 और 2026 में दो ICC T20I खिताब और 2025 में एक ICC चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीता, जिससे व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में उनका दबदबा साबित हुआ.
इसके अलावा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक ऐतिहासिक पल तब आया जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम ने नवंबर 2025 में नवी मुंबई के DY पाटिल स्टेडियम में खेले गए फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराकर अपना पहला ICC महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप खिताब जीता. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम को इस ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया, और देश ने पहली बार यह ट्रॉफी जीती.
बैडमिंटन में, पीवी सिंधु 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बनीं. 2022 में, भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने अपना पहला थॉमस कप खिताब जीता. नीरज चोपड़ा ने 2023 में बुडापेस्ट में अपना पहला वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड जीतकर एक और उपलब्धि हासिल की.
पेरिस 2024 पैरालंपिक्स में भारत का पैरालंपिक सफर भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचा, जहां देश ने रिकॉर्ड 29 मेडल जीते. यह भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन था और इसने भारत की खेल विरासत को और आगे बढ़ाया.
हाल ही में, ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में, भारत 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज) के साथ ओवरऑल स्टैंडिंग में चौथे स्थान पर रहा. देश की महिला गोल्ड मेडलिस्ट में बॉक्सर जैस्मिन लैंबोरिया, प्रीति पवार, प्रिया घांघस, साक्षी चौधरी और अरुंधति चौधरी के साथ-साथ वेटलिफ्टर मीराबाई चानू, जूडोका अस्मिता डे और पैरा-एथलीट शर्मिला धनखड़ शामिल थीं.
बॉक्सिंग में भारत के 10 मेडल कॉमनवेल्थ गेम्स में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा. इसने इंग्लैंड (1934 और 2018) और कनाडा (1986) के संयुक्त रूप से छह गोल्ड मेडल जीतने के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया.
हॉकी के मैदानों पर मिली पुरानी सुनहरी यादों से लेकर दुनिया भर में कई खेलों में पोडियम तक पहुंचने तक, भारत अपनी आज़ादी के 80वें साल में सिर्फ़ एक खेल वाले देश के तौर पर नहीं, बल्कि एक उभरती हुई ग्लोबल स्पोर्ट्स पावरहाउस के तौर पर कदम रख रहा है. भारत अब सिर्फ़ हिस्सा नहीं ले रहा है—वह 2036 के ओलंपिक खेलों की मेज़बानी करने के लिए दावेदारी पेश कर रहा है.
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