Tejaswin Shankar's inspirational story: ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में धुआंधार प्रदर्शन कर रहे भारतीय खिलाड़ियों ने वीरवार को अपने प्रदर्शन से सभी को हैरान कर दिया. खासकर अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने महाकुंभ में जूडो में ऐसी दस्तक दी, जिसकी गूंज बहुत दूर तक जाएगी. और गूंज डेकाथलन में कांस्य जीतने वाले तेजस्विन शंकर की भी जाएगी, जो बनना तो क्रिकेटर चाहते थे, लेकिन उनकी किस्मत में तो कॉमवेल्थ का कांस्य लिखा था. वास्तव में तेजस्विन की कहनी बहुत ही रुचिकर और प्रेरणादायक है
बचपन और शुरुआत
तेजस्विन का शुरुआती झुकाव क्रिकेट की तरफ था. वह एक अच्छे क्रिकेटर बनना चाहते थे और स्कूल स्तर पर क्रिकेट ही खेलते थे. लेकिन उनके स्कूल के कोच ने उनकी शारीरिक बनावट और ऊंचाई को देखते हुए उन्हें एथलेटिक्स आजमाने की सलाह दी. शुरुआत में उन्होंने हाई जंप और लंबी कूद में हाथ आजमाया. बचपन से ही तेजस्विन में अलग-अलग खेलों को सीखने और उनमें तुरंत ढलने की गजब की क्षमता थी, जो आगे चलकर डेकाथलन में उनके बहुत काम आई. और डेकाथलन के जरिए एक नहीं, बल्कि कई स्पर्धाओं को गले से लगा लिया.
चोटों से चली अच्छी लड़ाई
तेजस्विन के करियर में कई बार गंभीर चोटें आईं, जिन्होंने उनके मनोबल को तोड़ने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने हर बार चोटों को मात देकर शानदार वापसी की. वहीं, तेजस्विन ने अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. वहां उन्होंने अपनी पढ़ाई और कड़े ट्रेनिंग शेड्यूल के बीच एक कठिन संतुलन बनाया. उन्हें अपनी ट्रेनिंग के लिए भारी शारीरिक और मानसिक मेहनत करनी पड़ी.
मूल रूप से हाई जंप के विशेषज्ञ होने के बावजूद, भारतीय एथलेटिक्स में मौकों और अपनी बहुमुखी प्रतिभा को देखते हुए उन्होंने डेकाथलन जैसी बेहद कठिन स्पर्धा में उतरने का कड़ा निर्णय लिया, जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक पसीना बहाया.
परिवार ने दिया कंधे से कंधा मिलाकर साथ
तेजस्विन की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान रहा है. हर कदम पर उन्होंने तेजस्विन को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा जब भी तेजस्विन को किसी इंजरी या असफलता के बाद निराशा घेरती थी, उनके परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
करियर का टर्निंग प्वाइंट
तेजस्विन ने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में हाई जंप में भारत के लिए ऐतिहासिक पदक जीता था. हालांकि, एथलेटिक्स महासंघ के साथ कुछ प्रशासनिक और चयन संबंधी मुद्दों के बाद उन्होंने अपनी क्षमताओं का दायरा बढ़ाने का फैसला किया. जब उन्होंने डेकाथलन में हाथ आजमाने का फैसला किया, तो खेल विशेषज्ञों ने इसे एक असंभव सा कदम माना क्योंकि डेकाथलन में 10 अलग-अलग विधाओं (दौड़, कूद, थ्रो) में महारत हासिल करनी होती है. इस चुनौती को स्वीकार करना ही उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
ऐतिहासिक उपलब्धियां
तेजस्विन शंकर ने इससे पहले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हाई जंप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था, जो इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक था. इसके बाद उन्होंने डेकाथलन में अपनी छाप छोड़ी. 10 कठिन स्पर्धाओं (100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉट पुट, हाई जंप, 400 मीटर दौड़, 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, जैवलिन थ्रो और 1500 मीटर दौड़) में दो दिनों तक लगातार पसीना बहाते हुए तेजस्विन ने अंततः कांस्य पदक पर कब्जा जमाया.
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