NDTV Exclusive Interview of CWG 2026 Boxing Winners: भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया. भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाली प्रीति पवार से NDTV ने एक्सक्लूसिव बातचीत की. इस दौरान प्रीति ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बॉक्सिंग उनके जीवन का हिस्सा कैसे बनी. उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह परिवार के मार्गदर्शन और हौसला-अफजाई ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उन्होंने भारत का नाम रोशन करते हुए तिरंगे का मान बढ़ाया.
सवाल - जब गोल्ड मेडल पहनाया जा रहा था तो क्या याद आ रहा था पीछे मुड़कर देखती हैं तो आपको घर वालों का चेहरा याद आता है या देशवासियों का चेहरा याद आता है?
अपनी जीत और उस भावुक पल को याद करते हुए प्रीति ने कहा, "बिलकुल, यह सब परिवार की वजह से हुआ है. मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं स्पोर्ट्स में आऊंगी. यह मेरे पापा और अंकल का फैसला था. उन्होंने मुझे स्पोर्ट्स चुनने के लिए बहुत हौसला दिया. आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि उस समय बॉक्सिंग को चुनने का फैसला बिल्कुल सही था और आज उसका नतीजा सबके सामने है."
इसके साथ ही NDTV ने सचिन सिवाच, अंकुश पंघाल और नरेंद्र बेरवाल से भी खास बातचीत की और उनका अनुभव जाना.
सचिन सिवाच (स्वर्ण पदक विजेता)
सवाल: रणनीति के हिसाब से आपने क्या सोचा था? मुकाबले में किस तरह के बदलाव किए?
जवाब: सचिन सिवाच ने कहा हां, यही प्लान था. पहले जो गलतियां पहले की फाइट्स में हुई थीं, उन्हें अपनी कोच से डिस्कस किया. हमने अपने विरोधियों की फाइट भी देखी और उनकी कमजोरियों पर भी चर्चा की. फिर सभी ने अपना-अपना बेस्ट दिया और उसी का नतीजा आज सामने है.
सवाल: जब आप पहली बार बॉक्सिंग अकादमी पहुंचे थे, तब आपको 'अंडरनरिश्ड' कहा गया था. आज आपके गले में गोल्ड मेडल है. उस सफर के बारे में बताइए.
जवाब: पहले सभी यही कहते थे कि इतना पतला लड़का क्या करेगा. बहुत कुछ सुनने को मिला था. लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था और परिवार ने भी पूरा साथ दिया. घरवालों ने मेरे खान-पान, डाइट और आराम का पूरा ध्यान रखा. उसी मेहनत और विश्वास का नतीजा है कि आज मैं यहां तक पहुंचा हूं.
सवाल: आपकी इस सफलता के पीछे आपके पिता को बड़ा योगदान दिया जा रहा है.
जवाब: मेरे चाचा स्पोर्ट्समैन थे. वह कबड्डी खेलते थे. उन्हें ट्रेनिंग, डाइट और फिटनेस की अच्छी जानकारी थी. मैंने उन्हीं से बहुत कुछ सीखा और उसी का फायदा मुझे मिला.
सवाल: जब आपको अंडरनरिश्ड कहा जाता था, तब अपनी डाइट में क्या बदलाव किए?
जवाब: हमारा खाना तो हरियाणा का देसी खाना ही है. स्पोर्ट्समैन की डाइट अलग होती है. प्रोटीन पर ध्यान देता हूं. बाहर का खाना, तला-भुना या फास्ट फूड नहीं खाता. ज्यादातर घर का बना देसी खाना ही खाता हूं.
अंकुश पंघाल (स्वर्ण पदक विजेता)
सवाल: इस गोल्ड मेडल के पीछे आपकी तैयारी का सबसे बड़ा मंत्र क्या रहा?
जवाब: इसकी तैयारी काफी लंबे समय से चल रही थी. मेरा लक्ष्य साफ था कि यहां से अच्छा प्रदर्शन करके लौटना है. इससे पहले इंटरनेशनल टूर्नामेंट में मुझे गोल्ड नहीं मिला था. सिल्वर और ब्रॉन्ज जरूर मिले थे, इसलिए पहले बड़े टूर्नामेंट में गोल्ड जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है.
सवाल: नेशनल ट्रायल्स में शानदार प्रदर्शन के बाद क्या आपको भरोसा था कि ग्लासगो से गोल्ड लेकर लौटेंगे?
जवाब: ट्रायल्स के बाद मैंने पहले से भी ज्यादा मेहनत की. मन में यही था कि आगे जाकर और बेहतर करना है. विश्वास था कि अगर अपनी तैयारी पर कायम रहा तो देश के लिए गोल्ड जरूर जीत सकता हूं.
नरेंद्र बेरवाल (रजत पदक विजेता)
सवाल: सिल्वर मेडल जीतने के बाद इस वक्त जोश कैसा है?
जवाब: जोश बहुत अच्छा है. अब यह मेडल मिल गया है और अगला लक्ष्य एशियन गेम्स है. पिछली बार वहां ब्रॉन्ज मिला था.
सवाल: यानी अब उसका रंग बदलने की तैयारी है?
जवाब: जी हां, बिल्कुल. इस बार मेडल का रंग बदलना है.
सवाल: ग्लासगो से लौटने के बाद किस तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं?
जवाब: बहुत अच्छा स्वागत हुआ. एयरपोर्ट पर शानदार रिसेप्शन मिला. उसके बाद मंत्री जी से मुलाकात हुई, उन्होंने काफी मोटिवेट किया. अब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और प्रधानमंत्री जी से भी मुलाकात होगी. उनसे मिलकर हमेशा नई प्रेरणा मिलती है.
सवाल: ग्लासगो से इस मेडल के अलावा और क्या लेकर लौटे हैं?
जवाब: सबसे बड़ी चीज अनुभव है. इस टूर्नामेंट से काफी कुछ सीखने को मिला. अब कोशिश रहेगी कि आगे और बेहतर प्रदर्शन करूं.
फाइनल मुकाबले में प्रीति पवार ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा. तीसरे और अंतिम राउंड में भी वह पूरी तरह नियंत्रण में नजर आईं. उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो पर लगातार सटीक पंच लगाए और उन्हें वापसी का कोई मौका नहीं दिया. आखिरी मिनट तक प्रीति का आक्रामक खेल जारी रहा, जिसमें उनका दमदार लेफ्ट हुक और राइट हैंड पंच खास आकर्षण रहे.
पांचों जजों ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 10-8 का फैसला दिया. बैंटमवेट वर्ग की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज प्रीति ने दूसरे राउंड में भी आक्रामक प्रदर्शन जारी रखते हुए मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक जीता.
भिवानी की 22 वर्षीय मुक्केबाज और एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता प्रीति ने सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं