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मणिपुर में बंद के बीच सरकार सख्त, बिना अनुमति अनुपस्थित कर्मचारियों पर होगा एक्‍शन 

बंद के चलते घाटी में जनजीवन लगभग ठप हो गया है. कई स्थानों पर महिलाओं और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम किया, प्रदर्शन किए और वाहनों की आवाजाही को रोक दिया.

मणिपुर में बंद के बीच सरकार सख्त, बिना अनुमति अनुपस्थित कर्मचारियों पर होगा एक्‍शन 
मणिपुर में दुकानें बंद रहीं. (फाइल फोटो)

मणिपुर सरकार ने विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने इस संबंध में जारी एक परिपत्र में सभी विभागों के सचिवों और प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित करें.

जिलों के उपायुक्तों को निर्देश 

परिपत्र में कहा गया है कि उपस्थिति रिपोर्ट संबंधित प्रशासनिक विभागों को भेजी जाए और जो कर्मचारी बिना अनुमति अनुपस्थित पाए जाएं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए. सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों को भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी कार्यालयों और विभागों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करें, ताकि बंद के बावजूद प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो.

बंद से जनजीवन प्रभावित 

इस बीच, मणिपुर के इम्फाल घाटी और नागा बहुल पहाड़ी इलाकों में बंद के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इम्फाल घाटी के पांच-छह जिलों में ‘मेइरा पैबी' (महिला मशालधारी समूह) और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों द्वारा बंद बुलाया गया है.

यह विरोध प्रदर्शन 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले में दो नाबालिग बच्चों की हत्या और उनकी मां के घायल होने की घटना के खिलाफ हो रहा है, जिसके लिए कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

दुकानें और बाजार बंद रहे 

पुलिस के अनुसार, सड़कों पर यात्री और व्यावसायिक वाहन नहीं चले, जबकि दुकानें, बाजार और फुटपाथ विक्रेता बंद रहे, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा. वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने 18 अप्रैल को उखरुल जिले में दो नागा नागरिकों, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल हैं, की हत्या के विरोध में रविवार आधी रात से तीन दिन का पूर्ण बंद बुलाया है.

मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदास सिंह ने लोगों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे जनहित, सामान्य जीवन और प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए बंद वापस लें.

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