अब्दुल का पूरा कुनबा नशे के काले कारोबार में शामिल है...
- मुंबई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गिरोह का पर्दाफाश किया
- नशे की काली कमाई से महंगी कारें, आधा दर्जन मकान खरीदे
- गिरोह का सरगना अब्दुल मोहम्मद शेख उर्फ़ अब्दुल
मुंबई:
मुंबई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग के धंधे में शामिल एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसमे लगभग पूरा खानदान शामिल है. नशे के खानदानी सौदागर इस परिवार ने काली कमाई से महंगी कारें, आधा दर्जन मकान और एक होटल तक बना रखा है.
गिरोह का सरगना अब्दुल मोहम्मद शेख उर्फ़ अब्दुल थाना ठाणे का रहने वाला है. 66 साल के अब्दुल ने अपने ससुर की मदद के लिए चरस के धंधे में कदम रखा था. आज अब्दुल का पूरा कुनबा नशे के काले कारोबार में शामिल है. बेटे आरिफ का ससुर अशरफ भी कश्मीर का बड़ा ड्रग माफिया है.
मुंबई एनसीबी के जोनल डायरेक्टर कुमार संजय झा के मुताबिक अब्दुल को गिरफ़्तार कर जब गहन छानबीन की गई तो पता चला कि उसकी पत्नी, बेटा आरिफ, 2 बेटियां रुबिना, रेहाना और उनके दामाद भी चरस के धंधे में लिप्त हैं.
कुमार संजय झा के मुताबिक अब्दुल ने सन 1980 में चरस का कारोबार तब शुरू किया था जब चरस 1200 रुपया किलो बिकती थी. आज बाजार में चरस की कीमत 120000 रुपये किलो है. चरस के काले कारोबार से अब्दुल का कुनबा अकूत संपत्ति बना चुका है. उनके पास महंगी कारों के साथ ही जलगांव में शालीमार नाम का एक आलीशन होटल शालीमार है. इसके अलावां मुंबई और ठाणे में तक़रीबन मकान हैं.
अभी तक अब्दुल शेख, बेटा आरिफ शेख और दामाद अब्दुल करीम यूनुस कारोबारी उर्फ़ लाला भाई एनसीबी के हत्थे चढ़ चुके हैं. जबकि बेटी रुबीना और रेहाना फरार हैं. अब्दुल की पत्नी नजमा पर भी एनडीपीएस के तहत मामले दर्ज हैं. चरस के कारोबार में लिप्त इस कुनबे का नेटवर्क मुंबई से लेकर कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक फैला है.
गिरोह का सरगना अब्दुल मोहम्मद शेख उर्फ़ अब्दुल थाना ठाणे का रहने वाला है. 66 साल के अब्दुल ने अपने ससुर की मदद के लिए चरस के धंधे में कदम रखा था. आज अब्दुल का पूरा कुनबा नशे के काले कारोबार में शामिल है. बेटे आरिफ का ससुर अशरफ भी कश्मीर का बड़ा ड्रग माफिया है.
मुंबई एनसीबी के जोनल डायरेक्टर कुमार संजय झा के मुताबिक अब्दुल को गिरफ़्तार कर जब गहन छानबीन की गई तो पता चला कि उसकी पत्नी, बेटा आरिफ, 2 बेटियां रुबिना, रेहाना और उनके दामाद भी चरस के धंधे में लिप्त हैं.
कुमार संजय झा के मुताबिक अब्दुल ने सन 1980 में चरस का कारोबार तब शुरू किया था जब चरस 1200 रुपया किलो बिकती थी. आज बाजार में चरस की कीमत 120000 रुपये किलो है. चरस के काले कारोबार से अब्दुल का कुनबा अकूत संपत्ति बना चुका है. उनके पास महंगी कारों के साथ ही जलगांव में शालीमार नाम का एक आलीशन होटल शालीमार है. इसके अलावां मुंबई और ठाणे में तक़रीबन मकान हैं.
अभी तक अब्दुल शेख, बेटा आरिफ शेख और दामाद अब्दुल करीम यूनुस कारोबारी उर्फ़ लाला भाई एनसीबी के हत्थे चढ़ चुके हैं. जबकि बेटी रुबीना और रेहाना फरार हैं. अब्दुल की पत्नी नजमा पर भी एनडीपीएस के तहत मामले दर्ज हैं. चरस के कारोबार में लिप्त इस कुनबे का नेटवर्क मुंबई से लेकर कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक फैला है.
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