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डार्कनेट पर 'टीम कल्कि' का खात्मा, जेल में बनी दोस्ती, फिर शुरू किया देश का सबसे बड़ा ड्रग नेटवर्क

NCB ने 'टीम कल्कि' नामक डार्कनेट वेंडर का भंडाफोड़ किया है. तिहाड़ जेल में मिले दो शातिर अपराधियों ने क्रिप्टो और 'डेड ड्रॉप' तकनीक के जरिए पूरे देश में LSD और MDMA जैसी सिंथेटिक ड्रग्स का जाल फैला रखा था.

डार्कनेट पर 'टीम कल्कि' का खात्मा, जेल में बनी दोस्ती, फिर शुरू किया देश का सबसे बड़ा ड्रग नेटवर्क
  • NCB ने तीन महीने की जांच के बाद दिल्ली में डार्कनेट ड्रग नेटवर्क टीम कल्कि का भंडाफोड़ किया
  • टीम कल्कि के जरिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड ऐप से ड्रग्स सप्लाई की जाती थी
  • आरोपी अनुराग ठाकुर और विकास राठी पहले भी नशीली दवाओं के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं और तिहाड़ जेल में थे
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने डार्कनेट के जरिए पूरे देश में चल रहे एक बड़े ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया . टीम कल्कि नाम से चल रहे इस गिरोह के जरिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई की जा रही थी. करीब तीन महीने की खुफिया जांच के बाद NCB ने दिल्ली में बड़ी कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क को तोड़ दिया.

NCB ने भारी संख्या में ड्रग किया बरामद

ऑपरेशन के दौरान NCB ने कुल 2338 LSD ब्लॉटर्स, 160 MDMA (एक्स्टेसी) की गोलियां, 73.612 ग्राम चरस, 3.642 ग्राम एम्फेटामिन और करीब 3.6 किलो लिक्विड MDMA बरामद की है. ये ड्रग्स 13 घरेलू पार्सलों और नीदरलैंड से आए 2 पार्सलों से जब्त किए गए, जो इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक यह मामला भारत में डार्कनेट के जरिए चल रहे ड्रग तस्करी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.

पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं आरोपी
जांच में सामने आया है कि टीम कल्कि नाम का यह डार्कनेट वेंडर अकाउंट अनुराग ठाकुर और उसके साथी विकास राठी चला रहे थे. दोनों पहले भी NDPS एक्ट के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं. विकास राठी पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक चरस तस्करी मामले में तिहाड़ जेल में बंद रह चुका है, जबकि अनुराग ठाकुर को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मेथामफेटामिन तस्करी केस में गिरफ्तार किया था. दोनों एक ही समय में तिहाड़ जेल में थे और वहीं से उनकी आपस में पहचान हुई, जिसके बाद उन्होंने मिलकर डार्कनेट पर यह ड्रग नेटवर्क शुरू किया.

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कैसे करते थे ड्रग्स की सप्लाई?
जांच के मुताबिक शुरुआत में आरोपी डार्क वेब के फोरम Dread पर सक्रिय थे, जहां उनके वेंडर अकाउंट को चार-स्टार रेटिंग मिली हुई थी. इसका मतलब है कि उन्होंने बड़ी संख्या में ऑर्डर पूरे किए थे. बाद में उन्होंने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप Session के जरिए भी ग्राहकों से संपर्क करना शुरू कर दिया, जिससे उनकी पहचान और लोकेशन छिपी रहे.

NCB के मुताबिक यह नेटवर्क देशभर में ड्रग्स की सप्लाई करता था. आरोपी नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी के डार्कनेट वेंडर्स से LSD और MDMA मंगाते थे. इसके बाद भारत के अलग-अलग राज्यों में ग्राहकों से ऑर्डर लेकर ड्रग्स को कूरियर और पार्सल सर्विस के जरिए भेजा जाता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डेड ड्रॉप नाम की एक खास तकनीक का इस्तेमाल करते थे. इसमें ड्रग्स से भरा पार्सल सीधे ग्राहक को देने के बजाय किसी तय जगह पर छिपाकर रख दिया जाता था. बाद में ग्राहक को उस जगह की जानकारी भेज दी जाती थी, ताकि वह खुद जाकर पार्सल उठा ले. इससे पुलिस की नजर से बचना आसान हो जाता था. हालांकि यह तरीका दिल्ली के कुछ इलाकों में ही इस्तेमाल किया जाता था, जबकि देशभर में ड्रग्स भेजने के लिए आरोपी ज्यादातर स्पीड पोस्ट और अलग-अलग कूरियर कंपनियों का इस्तेमाल करते थे.

साल भर में 1000 से ज्यादा पार्सल कर चुका है डिलीवर
जांच एजेंसियों का कहना है कि जनवरी 2025 से अब तक यह नेटवर्क 1000 से ज्यादा ड्रग्स के पार्सल देशभर में भेज चुका है. दिल्ली, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक में भी इस नेटवर्क से जुड़े कुछ पार्सल पहले ही जब्त किए जा चुके हैं.

NCB को आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट भी मिला है. आरोपी भुगतान के लिए Monero और USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे. पैसे को कई अलग-अलग वॉलेट के जरिए घुमाकर ट्रांजैक्शन को छिपाया जाता था, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसका पता न चल सके.

आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश कर रही एजेंसी 
NCB अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य साथियों की तलाश कर रही है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का भी पता लगाया जा रहा है. एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई देश में डार्कनेट के जरिए चल रही ड्रग तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान का हिस्सा है.

NCB ने लोगों से भी अपील की है कि अगर उन्हें नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त या तस्करी से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो वे MANAS – नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 1933) पर सूचना दे सकते हैं. एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.

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