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This Article is From Feb 01, 2016

जमीन नहीं हड़पी है, सरकारी नियमों के अनुसार पूरी कीमत चुकाउंगी : हेमा मालिनी

जमीन नहीं हड़पी है, सरकारी नियमों के अनुसार पूरी कीमत चुकाउंगी : हेमा मालिनी
बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी (फाइल फोटो)
मुंबई: मामूली कीमतों पर एक नृत्य संस्थान के लिए भूमि के आवंटन को लेकर विवादों के बीच अदाकारा-नेता हेमा मालिनी ने कहा कि उन्होंने जमीन हड़पी नहीं है और इसकी खरीदारी में सरकार के नियमों का पालन करेंगी।

विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा नीत सरकार पर उपनगर अंधेरी के एंबिवली में हेमा मालिनी के नाट्यविहार कलाकेंद्र चैरिटी ट्रस्ट को 70,000 रुपये की मामूली कीमत पर जमीन का आवंटन करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने अभी तक कुछ नहीं चुकाया है। मैं सरकार के सभी नियमों और प्रावधानों का पालन करूंगी। जब मैं खुद ही नहीं जानती हूं कि कितना मुझे अदा करना है तो अटकलें क्यों लगायी जा रही हैं... जो भी कीमत होगी मैं चुकाउंगी।’ मालिनी ने इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने के लिए कहा।

उन्होंने कहा, ‘इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनाने के लिए आप सबका शुक्रिया। इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाएं। मुंबई में नृत्य संस्थान बनाने का मेरा अधिकार है क्योंकि मैं यहां रहती हूं। मुझे नहीं पता कि क्यों मुद्दा बनाया जा रहा है।’ हेमा ने यह कहा कि जमीन हासिल करने के लिए उन्हें 20 साल तक मशक्कत करनी पड़ी।

हेमा मालिनी को अपना नृत्य संस्थान बनाने के लिए 2000 वर्ग मीटर जमीन को आवंटित किया गया है। इसके अलावा अंधेरी में एंबिवली में 27,000 वर्ग मीटर जमीन पर उद्यान विकसित करना होगा।

हेमा मालिनी ने कहा, ‘ऐसे ही मुझे जमीन नहीं मिल गयी। मुझे इसके लिए 20 साल तक संघर्ष करना पड़ा। जैसा कहा जा रहा है मैंने जमीन हड़पी नहीं है। सरकार ने मुझे यह दिया है..मैं नहीं गयी थी और हड़पी नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे नृत्य संस्थान के निर्माण के लिए 2,000 वर्गमीटर जमीन दी जा रही है।’ साथ ही कहा कि उन्हें उद्यान को विकसित कर बीएमसी को लौटाना होगा।

आरटीआई आवेदन के तहत प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक हेमा को 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन का आवंटन किया गया जिससे इसकी कीमत कुल 70,000 रुपये पड़ी जबकि इसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है।

मालिनी ने आगे कहा कि वह अपने नृत्य संस्थान की जमीन के लिए 1994 से ही मशक्कत कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘नृत्य संस्थान बनाने के लिए हमने सबसे पहले 1994 में जिलाधिकारी को एक पत्र लिखा। 1996 में भूमि का आवंटन हुआ और मंजूरी पत्र मिला। 2002 में वरसोवा में जमीन के लिए हमने 10 लाख रुपये चुकाए।’ अदाकारा को 2007 में बताया गया कि यह जमीन तटीय नियमन क्षेत्र (सीआरजेड) में है और वह इस पर नृत्य संस्थान नहीं बना सकती है।

उन्होंने कहा, ‘उसी साल हमें दूसरी जमीन के बारे में कहा गया। 2012 में हमें पता चला कि संस्थान के लिए वैकल्पिक 2000 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन किया गया है।’
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