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This Article is From Aug 25, 2016

ओला, उबर को पर्यटक परमिट पर कैसे चलने दिया गया : सरकार से हाईकोर्ट

ओला, उबर को पर्यटक परमिट पर कैसे चलने दिया गया : सरकार से हाईकोर्ट
मुंबई: बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से जानना चाहा कि किस नीति के तहत उबर और ओला जैसी कंपनियां राज्य में चल रही हैं और कैसे उन्हें पर्यटक परमिट पर चलने की अनुमति दी जा रही है.

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति कोलाबावाला की खंडपीठ एसोसिएशन ऑफ रेडियो टैक्सीज की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस एसोसिएशन में मेरू, मेगा और टैबकैब्स जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो ओला और उबर जैसी वेबसाइट और ऐप आधारित कैब कंपनियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही हैं.

याचिका में कहा गया है कि ये कैब कंपनियां पर्यटक परमिट पर चल रही हैं न कि राज्य में दूसरी टैक्सियों की तरह इलेक्ट्रॉनिक मीटर से इसीलिए किराए पर भी कोई नियमन नहीं है.

राज्य सरकार के वकील ने आज अदालत से कहा कि इस मुद्दे पर वे योजना तैयार करने पर विचार कर रहे हैं.

न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने कहा, ‘‘ये कैब :उबर और ओला: टैक्सी स्टैंड पर नहीं रूकती, इस पर अनुमति नहीं है, वे आपके नियमों का पालन नहीं करतीं. आपको :सरकार: इस पर विस्तार से जानकारी देने की जरूरत है. इन कैब सेवाओं पर निगरानी रखने की कोई व्यवस्था नहीं है. ये सब कब शुरू हुआ? आपने सड़कों पर केवल कारों की संख्या बढ़ा दी, जिससे अफरा..तफरी है.’’ पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दायर करे, जिसमें उसे दिखाना होगा कि किस नीति के तहत ऐसी कैब को चलने की अनुमति दी जाती है. अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख दो सितम्बर तय की है.


(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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