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This Article is From Jul 20, 2019

मध्य प्रदेश: स्पेशल टॉस्क फोर्स ने छापेमारी कर पकड़ी नकली दूध व पनीर बनाने की फैक्ट्रियां

पुलिस अधिकारी ने बताया कि लिक्विड डिटरजेंट, ग्लूकोज पाउडर में रसायन मिलाकर नकली दूध और मावा तैयार किया जा रहा था .

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मध्य प्रदेश: स्पेशल टॉस्क फोर्स ने छापेमारी कर पकड़ी नकली दूध व पनीर बनाने की फैक्ट्रियां
छापेमारी में नकली दूध और मावा जब्त किया गया
  • दो जिलों में पुलिस ने की छापेमारी
  • कई किलो नकली दूध भी बरामद
  • दिल्ली और यूपी भी भेजा जाता था नकली दूध व मावा
भोपाल:

मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टॉस्क फोर्स ने राज्य के कई जिलों में छापेमारी कर नकली दूध-पनीर व मावा बनाने की फैक्ट्रियों को सीज किया है. पुलिस ने यह छापेमारी ग्वालियर और चंबल इलाके की तीन फैक्ट्रियों पर की है. पुलिस की अभी तक की जांच के अनुसार इन तीनों फोक्ट्रियों में बनने वाले डेयरी प्रोडक्ट को दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों में भी भेजा जा रहा था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि लिक्विड डिटरजेंट, ग्लूकोज पाउडर में रसायन मिलाकर नकली दूध और मावा तैयार किया जा रहा था . पुलिस ने अभी तक इस मामले में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को शक है कि मामले में कई फूड इंस्पेक्टर भी शामिल हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक इनकी पहचान कर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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एसटीएफ के एसपी राजेश भदोरिया ने बताया कि टीम ने छापेमारी के दौरान 10,000 लीटर नकली / सिंथेटिक दूध, 500 किलो से ज्यादा नकली मावा और 200 किलो सिंथेटिक पनीर जब्त किया. “कुल 20 टैंकरों और 11 पिक-अप वैन में नकली दूध और संबद्ध उत्पाद जब्त किए गए थे. साथ ही, इन इकाइयों से बड़ी मात्रा में डिटर्जेंट, परिष्कृत तेल और ग्लूकोज पाउडर जब्त किया गया.तीन इकाइयों में निर्मित हर एक लीटर दूध (नकली दूध) में रिफाइंड तेल, तरल डिटर्जेंट (शैम्पू), सफेद पेंट और ग्लूकोज पाउडर के साथ 30% दूध का उपयोग किया गया.

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सिंथेटिक पनीर और मावा बनाने के लिए समान चीज़ों का उपयोग किया गया था. इस नकली उत्पाद को उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के सभी प्रमुख बाजारों में भेजा जाता था. सिंथेटिक दूध के उत्पादन में 5 रुपये प्रति लीटर का खर्च आता था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बाजारों में इसे 45 से 50 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बेचा जा रहा था. पनीर की आपूर्ति 100 रुपये से 150 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच की कीमतों पर की गई थी. इन तीन फैक्ट्रियों से रोजाना लगभग 2 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा था. 
 

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