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This Article is From Feb 05, 2020

मध्य प्रदेश : मंदिरों की जमीन नीलामी के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार के धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा मंदिरों की जमीन नीलाम करने की तैयारी विवादों में आ गई है और इस मुद्दे ने कांग्रेस (Congress) व बीजेपी (BJP) को आमने-सामने ला दिया है.

मध्य प्रदेश : मंदिरों की जमीन नीलामी के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार मंदिरों की जमीन नीलाम करने की तैयारी कर रही है. (फाइल फोटो)
  • मंदिरों की जमीन नीलाम करने की तैयारी में राज्य सरकार
  • नीलामी के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने
  • नीलामी की राशि से किया जाएगा मंदिरों का जीर्णोद्धार
भोपाल:

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार के धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा मंदिरों की जमीन नीलाम करने की तैयारी विवादों में आ गई है और इस मुद्दे ने कांग्रेस (Congress) व बीजेपी (BJP) को आमने-सामने ला दिया है. बीजेपी ने सरकार के इस प्रयास को हिंदू विरोधी करार दिया है और विरोध करने का ऐलान किया है. वहीं, कांग्रेस का कहना है कि असल में, मंदिर-मठों की जमीन कब्जा मुक्त कराए जाने से बीजेपी को तकलीफ हो रही है.

राज्य सरकार मंदिरों की जमीनों को नीलाम करने की तैयारी में है, इसके लिए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रस्ताव लाए जाने की चर्चा है. राज्य के धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग के मंत्री पी.सी. शर्मा ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान माना कि राज्य के कई मंदिरों के पास हजारों एकड़ जमीन है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है. ऐसी जमीनों की नीलामी किए जाने पर विचार हो रहा है. इससे आने वाली राशि से मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा.

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सरकार की इस कवायद पर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं. पूर्व मंत्री विश्वास सारंग का कहना है, 'जब से यह सरकार सत्ता में आई है, हिंदू विरोधी फैसले ले रही है. बीजेपी जमीन बेचने के फैसले का विरोध करेगी. सरकार बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए यह फैसला लेने जा रही है.' बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लूनावत ने ट्वीट कर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा, 'हनुमान भक्त कमल नाथ जी का फैसला. मंदिरों की जमीन ऑक्शन कर अब बिल्डरों को दिया जाएगा. मिस्टर 15 प्रतिशत की सरकार की भगवान जी से 50 फीसदी की पार्टनरशिप की पेशकश. वक्त है बदलाव का, एमपी मांगे जवाब.'

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वहीं, कांग्रेस के मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने सरकार की इस पहल को जरूरी बताया है. उनका कहना है कि यह निर्णय राज्य के मंदिरों-मठों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लिया जा रहा है. मंदिरों की अतिरिक्त जमीन भवन निर्माताओं को सौंपी जाएगी. इससे न केवल मंदिरों की आय सीधे उनके खाते में जाएगी, बल्कि अवैध कब्जे भी रुकेंगे. मंदिरों की जमीन भवन निर्माताओं को सौंपने की तैयारी के बीजेपी के आरोप का जवाब देते हुए शोभा ओझा ने कहा, 'सच तो यह है कि मंदिर-मठ की जमीनों पर बीजेपी संरक्षित माफिया कब्जा जमाए बैठे हैं. ये जमीन उनसे मुक्त कराई जाएगी. इस फैसले से बीजेपी इसलिए आहत है, क्योंकि सरकार के इस कदम से माफियाओं के हित प्रभावित होंगे.'

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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