UPSC Success Story Rupal Jaiswal: यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट 6 मार्च 2026 को जारी है. रिजल्ट में यूपीएससी साक्षात्कार की एक रोचक कहानी सामने आई है. ''अगर पति 20 करोड़ का मालिक हो और पत्नी बिना वजह तलाक ले, तो उसे कितना मेंटेनेंस मिलना चाहिए? UPSC के कड़े इंटरव्यू में जब बोर्ड ने मध्य प्रदेश के खंडवा की बेटी रूपल जायसवाल के सामने यह पेचीदा सवाल रखा, तो उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और संतुलित नजरिए से सबको कायल कर दिया.
रूपल ने तलाक के बाद करोड़पति पति से कितना मेंटेनेंस? वाले सवाल का न केवल सटीक जवाब दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि एक प्रशासनिक अधिकारी के लिए कानून और भावनाओं के बीच संतुलन कितना जरूरी है. वकालत छोड़ आईएएस (IAS) बनने का सपना देखने वाली रूपल ने ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल की है.
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UPSC Success Story Rupal Jaiswal Interview
वकालत छोड़ चुनी प्रशासनिक सेवा की राह
खंडवा में बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर धनंंजय जायसवाल की बेटी रूपल ने शुरुआती पढ़ाई के बाद वकालत की, लेकिन उनका मन हमेशा प्रशासनिक सेवा में जाने का था. पहले प्रयास में असफल होने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. तैयारी के लिए उन्होंने एनसीईआरटी की किताबों, टेस्ट सीरीज और उत्तर लेखन पर ध्यान केंद्रित किया. रूपल प्रतिदिन 8 घंटे पढ़ाई करती थीं, जिसे मेंस परीक्षा के समय उन्होंने बढ़ा दिया था.
UPSC Interview: इंटरव्यू में तलाक पर सवाल
रूपल के UPSC इंटरव्यू के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला सवाल पूछा गया. "यदि पति 20 करोड़ का मालिक हो और पत्नी बिना किसी ठोस कारण के तलाक ले, तो उसे कितना मेंटेनेंस मिलना चाहिए?" रूपल ने बड़ी ही परिपक्वता से जवाब देते हुए कहा कि यह इस पर निर्भर करेगा कि महिला कामकाजी है या नहीं, और बच्चों की कस्टडी किसके पास है. जब बोर्ड ने एक निश्चित राशि पूछी, तो रूपल ने 10% का सुझाव दिया. इस पर जब बोर्ड ने पूछा कि "50% क्यों नहीं?", तो रूपल का जवाब काबिले तारीफ था.
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UPSC Success Story Rupal Jaiswal Interview
यूपीएससी टॉपर रूपल ने अपने जवाब में कहा कि "मेंटेनेंस का अर्थ पति को सजा देना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पत्नी की बुनियादी जरूरतों और जीवन स्तर को बनाए रखना है." उनके इस संतुलित नजरिए से इंटरव्यू बोर्ड काफी प्रभावित हुआ.
महिला सशक्तिकरण पर स्पष्ट विचार
रूपल का मानना है कि महिला सुरक्षा तब तक अधूरी है जब तक पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना न सिखाया जाए. वे मानती हैं कि स्कूली किताबों से वह सामग्री हटनी चाहिए जो महिलाओं को केवल रसोई तक सीमित दिखाती है. उनका लक्ष्य कलेक्टर बनकर महिलाओं और वंचित वर्गों का उत्थान करना है.
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परिवार ने हर कदम पर दिया साथ
रूपल की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा. पढ़ाई के दौरान उनका छोटा भाई जरूरी डॉक्यूमेंट और फोटोकॉपी लाकर उनकी मदद करता था, ताकि उनका समय बर्बाद न हो. उनकी मां भी घर के कामों के बजाय उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती थीं. पिता ने भी उन्हें बेटे की तरह पूरा समर्थन दिया. परिवार के इसी सहयोग और रूपल की मेहनत का परिणाम है कि आज उन्होंने यूपीएससी में शानदार सफलता हासिल की है.
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