- उद्धव ठाकरे के 7 सांसद एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने के लिए तैयार हैं, जिससे शिवसेना में टूट का खतरा बढ़ गया है
- एक सांसद ने कहा कि उनकी पत्नी के निधन पर उद्धव ठाकरे ने न तो फोन किया और न ही उनसे मिलनेआए, जिससे वे नाराज हैं
- दूसरे सांसद ने कहा कि उनके एक्सीडेंट के समय उद्धव ठाकरे ने मदद नहीं की जबकि शिंदे और फडणवीस ने मदद की
उद्धव ठाकरे की शिवसेना पर टूट का खतरा मंडरा रहा है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने को तैयार हैं. इस बीच ये भी जानना जरूरी है कि आखिर ऐसी क्या नाराजगी है कि उद्धव के सांसद उनका साथ छोड़ विरोधी खेमे का दामन थामना चाहते हैं. क्या शिवसेना यूबीटी में सबकुछ ठीक नहीं है? कुछ सांसदों की नाराजगी की वजह सामने आई है.
पत्नी का निधन हुआ, उद्धव ने फोन तक नहीं किया
शिवसेना यूबीटी में टूट की खबरों के बीच एक सांसद ने अपनी नाराजगी की वजह बताई है. उन्होंने कहा कि एक बार उद्धव ठाकरे उनके संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आए थे. उनके पूरे दौरे की प्लानिंग और खर्च सांसद ने उठाया था. उसी समय, इस उनकी पत्नी का निधन हो गया. लेकिन, उद्धव ठाकरे ने न तो इस बारे में पूछने के लिए उनको फोन किया और न ही उनसे मिलने उनके घर गए. इसके उलट, अमित शाह ने फोन करके उनको को दिलासा दिया. सांसद को इस बात का अफसोस हुआ कि उद्धव ठाकरे उनके दुख में उनके साथ नहीं थे.
एक्सीडेंट हुआ तो उद्धव ने नहीं की मदद
उद्धव के दूसरे सांसद की नाराजगी भी सामने आई है. सांसद ने बताया कि उनका एक्सीडेंट हो गया था. उनके पैर में गंभीर चोट लगी थी. उस समय एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने फोन करके उनके इलाज में मदद की थी. इस वजह से वह उद्धव ठाकरे से नाराज हैं.
शिवसेना UBT ने नहीं उठाया चुनाव का खर्च
तीसरे सांसद की नाराजगी की वजह लोकल बॉडी इलेक्शन में उद्धव ठाकरे की तरफ से मदद न मिलना है. उन्होंने बताया कि चुनाव का पूरा खर्च उन्होंने अपनी जेब से उठाया. लेकिन दूसरी पार्टियों ने काफी पैसा खर्च किया था. सांसद ने उद्धव ठाकरे से पैसे की मदद मांगी थी लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की. इस वजह से सांसद के कार्यकर्ता और पदाधिकारी नाराज होकर चले गए. सांसद ने यह बात उद्धव ठाकरे के करीबी लोगों को बताकर इस पर नाराजगी भी जताई थी.
उद्धव से क्यों नाराज हैं UBT सांसद?
सांसदों की शिकायतों से ऐसा लग रहा है कि वे उद्धव के व्यवहार से खुश नहीं हैं. उनके नेता दुख में उनके साथ नहीं होते. लेकिन विरोधी खेमे के नेता उनसे उनका दुख बांटते हैं. इसी बात से सांसदों का उद्धव की पार्टी से मोह भंग हो रहा है और वह उन लोगों के साथ जाना चाहते हैं जिन्होंने परेशानी में उनको करीबी का ऐहसास करवाया, जो उनको खुद की पार्टी से नहीं मिला.
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