Operation Tiger: मराठा राजनीति के केंद्र मुंबई से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक इस वक्त सियासी पारा चढ़ा हुआ है. शिवसेना (यूबीटी) एक बार फिर इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़ी है. दरअसल, अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरें इशारा कर रही हैं कि उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) इस वक्त टूटने की कगार पर पहुंच चुकी है. इस संभावित बिखराव और विरोधी खेमे के 'ऑपरेशन टाइगर' को नाकाम करने के लिए मातोश्री ने अब अपना 'क्राइसिस मैनेजमेंट' प्लान एक्टिव कर दिया है. खुद उद्धव ठाकरे और उनके सिपहसालार हर एक सांसद को सहेजने में जुट गए हैं.
दरअसल, पार्टी के भीतर बगावत की सुगबुगाहट को भांपते हुए ठाकरे गुट के शीर्ष नेतृत्व ने मोर्चा संभाल लिया है. सूत्रों का कहना है कि उद्धव ठाकरे के निर्देश पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सांसदों को मनाने और उनकी नाराजगी दूर करने का काम सौंपा गया है. हर एक सांसद से अब व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधा जा रहा है. यानी सांसदों के मन में क्या चल रहा है, उनकी शिकायतें क्या हैं, इन सभी बातों को विस्तार से सुना जाएगा और इसकी पल-पल की रिपोर्ट सीधे उद्धव ठाकरे को सौंपी जाएगी, ताकि समय रहते डैमेज कंट्रोल किया जा सके.
सियासी हलचल के बीच दिल्ली में जुट रहे हैं ठाकरे के 'चार सिपाही'
एक तरफ जहां मुंबई में पार्टी को बचाने की कशमकश जारी है. वहीं, दूसरी तरफ देश की सियासी राजधानी दिल्ली में ठाकरे गुट की बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के चार प्रमुख सांसद इस वक्त दिल्ली में मौजूद रहेंगे. फायरब्रांड नेता संजय राउत और वरिष्ठ नेता अनिल देसाई पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं, सांसद अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे भी कल यानी बुधवार को दिल्ली पहुंच जाएंगे.
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आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है कि संजय राउत, अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे हैं. लेकिन, महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इस दौरे के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह सिर्फ एक रूटीन बैठक है, या फिर टूट की कगार पर खड़ी पार्टी के अस्तित्व को बचाने के लिए दिल्ली के मंच पर कोई नई बिसात बिछाई जा रही है? बहरहाल, मातोश्री की नजरें इस वक्त अपने हर एक 'टाइगर' पर टिकी हैं.
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