- महाराष्ट्र में पहली बार सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचने जा रही हैं
- 1960 से अब तक महाराष्ट्र में कोई महिला मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री नहीं बनी थी
- सुनेत्रा पवार के पास परिवार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक कार्यों का व्यापक अनुभव है
महाराष्ट्र की राजनीति नई करवट लेती नजर आ रही है. अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. बताया जा रहा है कि आज शाम वह पद और गोपनीयता की शपथ लेंगी. ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब महाराष्ट्र में कोई महिला 'उपमुख्यमंत्री' बनने जा रही है. 1960 में बने महाराष्ट्र में इससे पहले कोई भी महिला मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री के पद पर बैठी नजर नहीं आई है. यहां तक कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में गृह मंत्रालय या वित्त मंत्रालय जैसा पावरफुल मंत्रालय की कमान संभालते हुए भी नजर नहीं आई हैं. ऐसे में सुनेत्रा पावर महाराष्ट्र की राजनीति में इतिहास बनाने जा रही हैं.
महाराष्ट्र में अब तक कितने नेता बने डिप्टी सीएम
| क्र.सं. | उपमुख्यमंत्री | पार्टी | मुख्यमंत्री |
| 1 | नाशिक राव त्रिपुटे | कांग्रेस | वसंतदादा पाटिल |
| 2 | सुंदरराव सोलंके | कांग्रेस (सोशलिस्ट) | शरद पवार |
| 3 | रामराव अदिक | कांग्रेस | वसंतदादा पाटिल |
| 4 | गोपीनाथ मुंडे | बीजेपी | मनोहर जोशी/नारायण राणे |
| 5 | छगन भुजबल | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | विलासराव देशमुख/सुशील शिंदे/अशोक चव्हाण |
| 6 | विजय सिंह मोहित पाटिल | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | सुशील कुमार शिंदे |
| 7 | आर आर पाटिल | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | विलासराव पाटिल |
| 8 | अजित पवार | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे |
| 9 | देवेंद्र फडणवीस | बीजेपी | एकनाथ शिंदे |
| 10 | एकनाथ शिंदे | शिवसेना | देवेंद्र फडणवीस |
महाराष्ट्र की राजनीति में महिलाओं की स्थिति
मुख्यमंत्री- 1960 में राज्य के गठन से लेकर अब तक (2026), महाराष्ट्र में कोई भी महिला मुख्यमंत्री नहीं बनी है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में यह एक चर्चा का विषय रहा है.
उप-मुख्यमंत्री- महाराष्ट्र के इतिहास में पहली महिला उप-मुख्यमंत्री बनने का गौरव सुनेत्रा पवार को मिलने जा रहा है. वह आज शाम मंत्री पद की शपथ लेंगी. उनसे पहले किसी महिला ने इस पद की शपथ नहीं ली थी.
देश का सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति)- महाराष्ट्र ने देश को पहली महिला राष्ट्रपति दी है. प्रतिभा पाटिल महाराष्ट्र से ही आती हैं. राष्ट्रपति बनने से पहले वे महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुकी थीं.

प्रमुख कैबिनेट और विधायी पद
अदिति तटकरे- महायुति सरकार में वे कैबिनेट मंत्री बनीं और उन्हें एक समय में 'पहली महिला कैबिनेट मंत्री' के तौर पर भी देखा गया (हालांकि, पूर्व में भी महिलाएं मंत्री रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में वे प्रमुख चेहरा बनीं).
पंकजा मुंडे- पिछली भाजपा-शिवसेना सरकार में वे 'ग्रामीण विकास' जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभाग की कैबिनेट मंत्री थीं.
वर्षा गायकवाड़- कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री, जो वर्तमान में मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष हैं.
नीलम गोरे- वे महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति (Deputy Chairperson) जैसे गरिमामयी पद पर लंबे समय से काबिज हैं.
सुप्रिया सुले- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा में एक प्रखर आवाज. उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे ताकतवर चेहरों में गिना जाता है.
मृणाल गोरे- 'पानी वाली बाई' के नाम से मशहूर, वे विपक्ष की एक बेहद मजबूत नेता रही हैं.
विमल मुंदड़ा और प्रभा राव- इन्होंने भी अतीत में राज्य सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है.

सुनेत्रा पवार के सामने कई चुनौतियां
सुनेत्रा पवार की सबसे बड़ी ताकत, उनकी पार्टी के नेताओ का उनके प्रति झुकाव है. उनके पास परिवार की विरासत भी है और सामाजिक कार्यों का अनुभव भी. लेकिन राजनीति के इस नए अध्याय में सुनेत्रा पवार के सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं. अजित पवार की विरासत को आगे ले जाने के लिए उन्हें केवल नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक एग्रेसन और प्रशासनिक नेतृत्व की कसौटी पर भी खुद को साबित करना होगा.भले ही सक्रिय राजनीति की पिच पर उनका औपचारिक अनुभव पारंपरिक अर्थों में बहुत अधिक रोमांचक या 'एग्रेसिव' न दिखे, लेकिन उनकी व्यक्तिगत स्थिति उन्हें एक ऐसे ऊंचे पायदान पर खड़ा करती है, जहां से उन्होंने सत्ता और नीति-निर्माण के हर उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखा है.

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विरासत में मिली राजनीति
सुनेत्रा पवार ने परिवार के भीतर दशकों तक राजनीति और प्रशासन की बारीकियों को देखा है. वे केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे उस 'हाई टेबल' का हिस्सा रही हैं जहां महाराष्ट्र और देश के बड़े राजनीतिक फैसले लिए जाते रहे हैं. 1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में जन्मीं सुनेत्रा पवार एक मराठा परिवार से आती हैं, जिसकी स्थानीय राजनीति में गहरी जड़ें रही हैं. उनके पिता बाजीराव पाटिल क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति थे, जबकि उनके भाई पद्मसिंह बाजीराव पाटिल 1980 के दशक में जिले की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे. पवार परिवार में विवाह से बहुत पहले ही सुनेत्रा पवार का पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ, जहां सार्वजनिक जीवन और राजनीति रोज़मर्रा की बातचीत का हिस्सा थे.
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