छत्रपति संभाजीनगर में हाईकोर्ट क्लर्क भर्ती के 'स्किल टेस्ट' में परीक्षा केंद्र पर बड़ी लापरवाही देखने को मिली है. परीक्षे केंद्र पर ना तो कंप्यूटरों की संख्या पर्याप्त थी और ना ही कीबोर्ड चल रहे थे. इस वजह से अभ्यार्थियों को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था.
बताया तो यह भी जा रहा है कि परीक्षा केंद्र पर सभी छात्रों के लिए बैठने तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. जो थोड़े-बहुत कंप्यूटर उपलब्ध भी थे, वे भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे और बीच परीक्षा में ही अचानक बंद हो रहे थे.
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई कंप्यूटरों के कीबोर्ड काम ही नहीं कर रहे थे. समझने वाली बात यह है कि इस प्रकार की परीक्षा में टाइपिंग काफी जरूरी रहती है, लेकिन जब कीबोर्ड ही काम नहीं कर रहे थे, इस वजह से अभ्यार्थी काफी परेशान हुए.
इस प्रकार की लापरवाही का मामला भी तब सामने आया है जब देश के कई राज्यों में पेपर लीक की वजह से छात्र खासा आक्रोशित हैं. राजधानी दिल्ली में तो कुछ दिन पहले तक जंतर-मंतर पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था. उस वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था. इसके अलावा झारखंड के रांची में भी बड़ी संख्या में छात्र JPSC-JSSC परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान, हरियाणा, गुवाहाटी, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और महाराष्ट्र से जुड़े विभिन्न पेपर लीक मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के केस दर्ज किए हैं. इन मामलों में पहले से दर्ज एफआईआर और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को आधार बनाकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है. एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि परीक्षा में कथित धांधली के जरिए किस तरह आर्थिक लाभ अर्जित किया गया और इसका फायदा किन लोगों तक पहुंचा.
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