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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को जमानत, उम्रकैद की सजा पर लगी रोक

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मामले में दो मुख्य दोषियों को सजा सुनाई गई थी. इनमें से एक दोषी शरद कलसकर को अप्रैल में जमानत मिली थी. अब दूसरा दोषी भी जेल से बाहर आने वाला है.

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को जमानत, उम्रकैद की सजा पर लगी रोक
  • नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड के मुख्य दोषी सचिन अंदुरे को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है.
  • अदालत के इस फैसले के बाद दाभोलकर हत्याकांड के दोनों मुख्य शूटर जेल से बाहर होंगे.
  • 2013 को पुणे में अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता डॉ. दाभोलकर की मॉर्निंग वॉक के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी.
मुंबई:

सामाजिक कार्यकर्ता और तर्कवादी डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार, 18 अगस्त को अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने हत्या के मामले में मुख्य दोषी, दक्षिणपंथी चरमपंथी और शूटर सचिन अंदुरे को जमानत दे दी है. इसके साथ ही, कोर्ट ने दोषी की उम्रकैद की सजा पर रोक भी लगा दी है. जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले की डिवीजन बेंच ने यह आदेश सुनाया. बता दें कि अगस्त 2013 में डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हाई कोर्ट ने पुणे सत्र न्यायालय द्वारा अंदुरे को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को भी फिलहाल निलंबित कर दिया है.

बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद, कोर्ट ने सचिन अंदुरे की जमानत याचिका मजूर की और उसकी सजा पर रोक लगा दी. इस फैसले के बाद सचिन अंदुरे के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है.

साल 2024 की शुरुआत में पुणे के स्पेशल सेशन कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया था. कोर्ट ने सचिन अंदुरे और शरद कलसकर को डॉ. दाभोलकर पर गोलियां चलाने का मुख्य दोषी माना था और दोनों के लिए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की थी. सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था.

पहले ही बाहर आ चुका है सह-आरोपी

इस मामले के दूसरे मुख्य शूटर और सह-आरोपी शरद कलसकर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी साल अप्रैल महीने में ही जमानत दे दी थी. अब सचिन अंदुरे को भी जमानत मिल जाने से हत्या के दोनों मुख्य दोषी जेल से बाहर जेल से बाहर हो जाएंगे.

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13 साल पहले हुई थी हत्या

आज से ठीक 13 साल पहले, 20 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र के पुणे में 'महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' के संस्थापक डॉ. नरेंद्र दाभोलकर सुबह के वक्त पुणे के ओंकारेश्वर पुल पर मॉर्निंग वॉक कर रहे थे. इसी वक्त, बाइक पर सवार होकर आए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी. इस हमले में डॉ. दाभोलकर की मौके पर ही मौत हो गई थी.

अब दोषियों की रिहाई का फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब 20 अगस्त को डॉ. दाभोलकर की हत्या के पूरे 13 साल होने वाले हैं. उनके अंधविश्वास विरोधी अभियानों की वजह से उन पर यह जानलेवा हमला किया गया था. इस हत्याकांड ने पूरे देश में तर्कवादियों और विचारकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी थी.

(रुतिक गणकवार की र‍िपोर्ट)

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