- महाराष्ट्र में नवरात्रि और पर्यूषण पर्व को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने निर्देश जारी किए हैं.
- वीएचपी ने गरबा-डांडिया में मुस्लिम भागीदारी की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है.
- इसके अलावा पर्यूषण पर्व पर मीट बैन की मांग भी विश्व हिंदू परिषद ने की है.
महाराष्ट्र में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्यभर के गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश अभी से जारी किए हैं. आगामी नवरात्रि और जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व को लेकर धार्मिक आयोजनों, गरबा-डांडिया में प्रवेश और मांस बिक्री पर सियासत तेज हो गई है. मीरा-भायंदर में पर्युषण के दौरान मांस बिक्री बंद रखने को लेकर अभी विवाद दिख रहा है. विश्व हिंदू परिषद ने अभी से सख्ती से नियमों का पालन करवाने की मांग प्रशासन से की है. बता दें कि पिछले साल भी यह मुद्दा गर्माया था. जबकि इस बार भी आयोजनों से पहले ही राजनीति होती दिख रही है.
क्या है महाराष्ट्र से जुड़ा पूरा मामला?
नवरात्रि से पहले विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में होने वाले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी नहीं होने देने की बात कही है. वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा है कि संगठन ने नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया में मुस्लिम भागीदारी की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया है. VHP का कहना है कि नवरात्रि केवल मनोरंजन या नृत्य का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देवी की आराधना का पर्व है.
गरबा में आधार कार्ड की जांच और तिलक
विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों के लिए कुछ अतिरिक्त दिशा-निर्देश भी बताए हैं. इनमें प्रवेश से पहले आधार कार्ड की जांच और प्रतिभागियों के माथे पर तिलक लगाने की बात शामिल है. संगठन के मुताबिक इन कदमों का उद्देश्य आयोजनों के धार्मिक चरित्र को बनाए रखना और प्रतिभागियों की पहचान सुनिश्चित करना है. हालांकि, इन दिशा-निर्देशों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं और अलग-अलग आयोजनों में इन्हें किस तरह लागू किया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
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श्रीराज नायर ने कहा कि नवरात्रि का उद्देश्य देवी की पूजा है और संगठन त्योहारों के धार्मिक स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नहीं चाहता. VHP का कहना है कि ये प्रतिबंध किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदू त्योहारों की परंपरा और धार्मिक पहचान बनाए रखने के लिए हैं. हालांकि मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक और पहचान जांच जैसे प्रस्तावों ने इसे राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बना दिया है.
पर्यूषण पर मांस बिक्री का मुद्दा भी उठा
दूसरी तरफ जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व को लेकर मीरा-भायंदर में मांस बिक्री पर भी विवाद सामने आया है. 3 सितंबर को भाजपा के एक नगरसेवक ने पर्युषण के दौरान आठ दिनों तक मांस की दुकानें बंद रखने की मांग की. पर्यूषण इस साल 8 से 16 सितंबर के बीच मनाया जा रहा है. हालांकि मीरा-भायंदर नगर निगम ने फिलहाल 8 और 15 सितंबर को मांस बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. निगम के अनुसार इन दिनों मांस की दुकानें और संबंधित प्रतिष्ठान बंद रहेंगे तथा नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी.
मीरा-भायंदर में पहले से हैं नियम
मीरा-भायंदर नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक पर्यूषण के दौरान निर्धारित दो दिनों में नगर निगम क्षेत्र के बूचड़खाने और मांस की दुकानें बंद रखने का प्रावधान है. नगर निगम की तरफ से पर्युषण के बाकी दिनों में भी दुकानदारों से स्वेच्छा से दुकानें बंद रखने की अपील की जाती है.
इस पूरे विवाद में अब धार्मिक परंपरा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव का सवाल भी उठ रहा है. एक तरफ वीएचपी धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और हिंदू पहचान बनाए रखने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ गरबा में प्रवेश के लिए धर्म आधारित रोक और पहचान जांच जैसे कदमों पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है. वहीं पर्युषण के दौरान मांस बिक्री पर प्रतिबंध की अवधि बढ़ाने की मांग ने भी राजनीतिक टकराव को हवा दी है. ऐसे में महाराष्ट्र में आने वाले त्योहारों से पहले गरबा, डांडिया, मांस बिक्री और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं.
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