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महाराष्‍ट्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर 17 लाख सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी, जानें- क्‍या हैं इनकी मांगें

महाराष्‍ट्र के लगभग 17 लाख सरकारी, अर्ध सरकारी कर्मचारी और शिक्षक हड़ताल पर जा रहे हैं. कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.

महाराष्‍ट्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर 17 लाख सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी, जानें- क्‍या हैं इनकी मांगें
  • महाराष्ट्र में 17 लाख सरकारी कर्मचारी और शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं
  • हड़ताल के कारण राज्य के सरकारी कार्यालय, स्कूल और अस्पतालों में सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही
  • जालना जिले में कर्मचारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की
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जालना:

महाराष्‍ट्र  में लगभग 17 लाख सरकारी कर्मचारी और शिक्षक अपनी पुरानी पेंशन योजना और अन्य मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं. ये 17 लाख कर्मचारी, जिला परिषद सदस्य, और शिक्षक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी हैं. पुरानी पेंशन योजना लागू करना इनकी प्रमुख मांग है. इस हड़ताल का राज्य भर के सरकारी कामकाज और सेवाओं पर असर दिखना शुरू हो गया है, जिसमें सरकारी कार्यालय और स्कूल शामिल हैं. 

जालना में DM ऑफिस के बाहर हड़ताल पर बैठे कर्मचारी 
 

कई जिलों में सरकारी ऑफिस खाली नजर आ रहे हैं. लोग यहां पहुंच रहे हैं, लेकिन ऑफिस में काम करने वाले नजर नहीं आ रहे हैं. ऐसे में लोगों को परेशानी होनी शुरू हो गई है. अगर ये हड़ताल बुधवार या उससे ज्‍यादा समय तक जारी रही, तो मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं. जालना जिले में लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकारी-अर्धसरकारी और शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है. जालना में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आज सुबह 11 बजे से इन कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.

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ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें 
 

  • पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करना. 
  • अस्पतालों में परिचारिकाओं के रिक्त पदों को तत्काल भरना
  • ट्यूटर पदों पर पदोन्नति देना 
  • सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना

अस्‍पतालों में बुरा हाल, मरीजों का नहीं मिल रहा इलाज

इस हड़ताल में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों सहित लगभग सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया है. ऐसे में राज्‍य की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था लड़खड़ा सकती है.  अभी से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में अपने कामों के लिए आने वाले आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के इस आंदोलन में शामिल होने के कारण, अस्पतालों में जांच और इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. 

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जहां एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता का कहना है कि कर्मचारियों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन उन्हें नागरिकों को बंधक नहीं बनाना चाहिए. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रदर्शनकारी कर्मचारी इस बात का ध्यान रखें कि उनके आंदोलन से सामान्य जनता और मरीजों को तकलीफ न हो.

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