New Labour Codes Explained: नोएडा में वर्कर्स के हालिया बवाल के बाद एक बार फिर नए लेबर कोड को लेकर चर्चा तेज हो गई है. सरकार पहले ही इन नियमों को लागू करने की तैयारी कर चुकी है, लेकिन अभी ज्यादातर राज्य ट्रांजिशन मोड में हैं. यानी राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर नोटिफाई करेंगी, उसके बाद ये नियम पूरी तरह लागू होंगे.नए लेबर कोड लागू होने के बाद सैलरी स्ट्रक्चर, PF, ग्रेच्युटी, छुट्टियां, ओवरटाइम, वर्किंग घंटे और जॉब सिक्योरिटी जैसे कई नियम बदल जाएंगे. ऐसे में नौकरी करने वाले हर व्यक्ति के लिए इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी हो गया है.
आइए 10 आसान सवाल-जवाब में समझते हैं नया लेबर कोड आपके लिए क्या बदलने वाला है...
1.सवाल- नया लेबर कोड आखिर है क्या और इसमें क्या बदलाव होंगे?
जवाब - सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं. इनमें वेतन, इंडस्ट्रियल रिलेशन, सोशल सिक्योरिटी और वर्किंग कंडीशन से जुड़े नियम शामिल हैं.ये नियम केंद्र स्तर पर तैयार हैं, लेकिन पूरी तरह लागू तब होंगे जब राज्य सरकारें इन्हें नोटिफाई करेंगी.
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2.सवाल- क्या नए लेबर कोड से सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगा?
जवाब- हां. नए वेज कोड के मुताबिक अब बेसिक सैलरी + DA मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50% होना जरूरी होगा.इससे कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़ेगा और कई अलाउंस कम हो सकते हैं.
3. सवाल- क्या इन-हैंड सैलरी कम हो जाएगी?
जवाब- कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो सकती है क्योंकि बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी कटौती बढ़ सकती है.हालांकि लेबर मंत्रालय का कहना है कि जब तक PF की कटौती ₹15,000 लिमिट पर होती रहेगी, तब तक टेक-होम सैलरी कम होने की संभावना नहीं है.
4. सवाल- क्या PF और रिटायरमेंट सेविंग बढ़ जाएगी?
जवाब-हां. बेसिक सैलरी बढ़ने से PF योगदान और ग्रेच्युटी दोनों बढ़ेंगे.इसका फायदा यह होगा कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम ज्यादा मजबूत होगी और लॉन्ग-टर्म सेविंग बेहतर बनेगी.
5. सवाल- क्या ग्रेच्युटी के नियम बदल रहे हैं?
जवाब-हां, यह बड़ा बदलाव है.अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे और सिर्फ 1 साल लगातार काम करने पर ग्रेच्युटी मिल सकेगी.पहले इसके लिए 5 साल की नौकरी जरूरी होती थी.
6. सवाल- क्या काम के घंटे बदलेंगे?
जवाब-नए नियमों के तहत 8 घंटे का वर्किंग डे और 48 घंटे का वर्किंग वीक तय रहेगा.अगर कोई कंपनी 4 दिन का वर्किंग वीक लागू करती है, तो एक दिन में काम 12 घंटे तक हो सकता है.इसके बाद का काम ओवरटाइम माना जाएगा.
7. सवाल- ओवरटाइम के पैसे को लेकर क्या नया नियम है?
जवाब-अब 8 घंटे से ज्यादा या 48 घंटे सप्ताह से ज्यादा काम कराने पर ओवरटाइम का भुगतान दोगुना देना होगा.इससे कर्मचारियों की आय संरचना ज्यादा स्पष्ट और सुरक्षित बनेगी.
8. सवाल- क्या छुट्टियों और लीव एनकैशमेंट के नियम बदलेंगे?
जवाब- अब हर कर्मचारी को लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य होगा.इसमें सैलरी ब्रेकअप, काम के घंटे, छुट्टियां और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े अधिकार साफ-साफ लिखे होंगे लेकिन अगर पुराने नियम नए कानून से मेल नहीं खाते, तो कंपनियां संशोधित अपॉइंटमेंट लेटर या ऐडेंडम जारी कर सकती हैं.अब कंपनियों को अपॉइंटमेंट लेटर में साफ-साफ बताना होगा कि कितनी छुट्टियां मिलेंगी, कैसे जुड़ेंगी, आगे कैरी होंगी या नहीं और बची हुई छुट्टियों के बदले पैसे मिलेंगे या नहीं.इससे नौकरी बदलते समय छुट्टियों के सेटलमेंट में दिक्कत कम होगी.
9. सवाल- क्या सैलरी,PF ESIC और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े नियम भी बदलेंगे?
जवाब- हां. नए नियमों के तहत रोज काम करने वालों को शिफ्ट खत्म होते ही पेमेंट,साप्ताहिक कर्मचारियों को छुट्टी से पहले पेमेंट और मंथली सैलरी अगले महीने के 7 दिन के अंदर पेमेंट देना होगा वहीं, नौकरी छोड़ने पर 2 दिन के अंदर पूरा पेमेंट करना होगा.इसके अलावा 20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी में PF लागू होगा.ESIC सुविधा पूरे देश में मिलेगी.कॉन्ट्रैक्ट और गिग वर्कर्स को भी सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिलेगा
10. सवाल- क्या न्यूनतम वेतन को लेकर भी बदलाव होगा?
जवाब-हां. पहले न्यूनतम वेतन अलग-अलग राज्यों और सेक्टर में अलग होता था.अब सरकार नेशनल फ्लोर वेज तय करेगी, जिसे सभी राज्यों को मानना होगा.इससे कम सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को सीधा फायदा मिल सकता है. कंपनियों को हर साल फ्री हेल्थ चेकअप भी कराना होगा और बड़े संस्थानों में सेफ्टी कमेटी बनानी होगी.
कर्मचारियों के लिए नया लेबर कोड समझना क्यों जरूरी है?
नया लेबर कोड नौकरी के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है.कुछ बदलाव तुरंत राहत देंगे, जबकि कुछ का फायदा लंबे समय में मिलेगा.जैसे-
- PF बढ़ेगा
- ग्रेच्युटी मजबूत होगी
- सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगा
- छुट्टियों का हिसाब साफ होगा
- ओवरटाइम नियम तय होंगे
- सोशल सिक्योरिटी बढ़ेगी
ऐसे में हर कर्मचारी के लिए जरूरी है कि वह अपनी सैलरी स्लिप और अपॉइंटमेंट लेटर ध्यान से पढ़े और इन बदलावों को समझें. सही जानकारी के साथ ये बदलाव भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
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