Diploma Engineers Protest Tehri: उत्तराखंड के टिहरी में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ का आंदोलन अब सिर्फ धरना‑प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा. मांगों पर लंबे समय से हो रही अनदेखी से नाराज इंजीनियर्स ने इस बार विरोध का एक अनोखा और प्रतीकात्मक तरीका अपनाया है. सरकार और प्रशासन की “गहरी नींद” पर तंज कसते हुए इंजीनियर्स ने आंदोलन स्थल पर यज्ञ कर बुद्धि‑शुद्धि की कामना की. मंत्रोच्चार और हवन के बीच यह संदेश साफ था अब सिर्फ मांग नहीं, सिस्टम पर सीधा सवाल है.
टिहरी से मनीष सिंह की रिपोर्ट...
धरने का बदला अंदाज, चर्चा में आया आंदोलन
टिहरी में चल रहा डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ का धरना इन दिनों सुर्खियों में है. वेतन विसंगति, प्रमोशन, पुरानी पेंशन, भत्ते और भर्ती समेत 27 मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन को आज 16 दिन पूरे हो चुके हैं. इंजीनियर्स का कहना है कि बार‑बार ज्ञापन देने और बातचीत की कोशिशों के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
यज्ञ के जरिए जताई नाराजगी
प्रशासन की बेरुखी से आहत इंजीनियर्स ने आंदोलन स्थल पर गायत्री परिवार को आमंत्रित कर हवन और शुद्धिकरण कराया. मंत्रों की गूंज के बीच अधिकारियों और शासन में बैठे प्रतिनिधियों की “बुद्धि जागृत” होने की कामना की गई. यह आयोजन आस्था से कहीं अधिक एक तीखा व्यंग्य था, जो सीधे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है.
प्रांतीय सचिव ने क्या कहा
महासंघ के प्रांतीय सचिव सतीश भट्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आंदोलन को 16 दिन हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने अब तक संज्ञान नहीं लिया. उन्होंने बताया कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हैं, जिससे पेयजल, जल संस्थान और हॉटमिक्स जैसे कई विकास कार्य ठप पड़े हैं. इसी उपेक्षा के चलते इंजीनियर्स ने बुद्धि‑शुद्धि यज्ञ का सहारा लिया.
विकास कार्य प्रभावित, फिर भी चुप्पी
धरने के कारण राज्य और जिले स्तर पर कई महत्वपूर्ण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है. यही वजह है कि इंजीनियर्स का अक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है और आंदोलन का स्वर भी तेज होता जा रहा है.
आंदोलन के और तेज होने के संकेत
सतीश भट्ट ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि फिलहाल “वेट एंड वॉच” का सप्ताह चल रहा है. अगर इसके बाद भी कोई समाधान नहीं निकलता है तो प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्देश पर आंदोलन को और तेज किया जा सकता है, यहां तक कि आमरण अनशन जैसे कदम उठाने पर भी मजबूर होना पड़ सकता है.
इंजीनियर्स का यह “यज्ञ वाला विरोध” अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि सिस्टम पर सीधा कटाक्ष बन गया है. बड़ा सवाल यही है कि क्या इस प्रतीकात्मक कदम से सरकार और प्रशासन की नींद टूटेगी, या फिर आंदोलन और उग्र रूप लेगा. फिलहाल टिहरी में यह अनोखा प्रदर्शन चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है.
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