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इस गांव में न ब्राह्मण,राजपूत और न दलित; पंचायत के इस फैसले को आप भी करेंगे सलाम

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सौदाला गांव ने एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है,जिसकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई देने लगी है.जातिगत भेदभाव की पुरानी दीवारों को तोड़ते हुए इस गांव ने खुद को आधिकारिक रूप से “जातिमुक्त गांव” घोषित कर दिया है.

इस गांव में न ब्राह्मण,राजपूत और न दलित; पंचायत के इस फैसले को आप भी करेंगे सलाम
  • महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सौदाला गांव ने खुद को आधिकारिक रूप से जातिमुक्त गांव घोषित किया
  • गांव के 15 युवाओं ने एक साथ रक्तदान कर जाति-धर्म से ऊपर उठकर भाईचारे का संदेश दिया
  • ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लिया गया
अहमदनगर:

कहते हैं कि अगर समाज को बदलना हो,तो शुरुआत अपने घर और आंगन से करनी चाहिए.महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सौदाला(ता. नेवासा) गांव ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है,जिसकी गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है.जाति-पांति के भेदभाव और ऊंच-नीच की दीवारों को ढहाते हुए सौदाला गांव ने खुद को “जातिमुक्त गांव” घोषित कर दिया है.

गांव की पहचान जाति से नहीं भाईचारे से होगी...

इस ऐतिहासिक फैसले की शुरुआत किसी भाषण से नहीं,बल्कि एक मानवीय संदेश से हुई.गांव के विभिन्न जाति और धर्मों के 15 युवाओं ने एक साथ रक्तदान कर यह संदेश दिया कि 'धमनियों में दौड़ने वाले रक्त का कोई धर्म नहीं होता'.इसके बाद ग्रामसभा में एकजुट होकर संकल्प लिया गया कि अब से गांव की पहचान जाति से नहीं,बल्कि भाईचारे से होगी. 

पूरे गांव ने एकसाथ मिलाया सुर

सरपंच शरद आरगडे की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष ग्रामसभा में प्रमोद झिंजाड के आह्वान पर ग्रामीणों ने ऐतिहासिक कदम उठाया. महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम,1958 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया. सरपंच ने जब 'जातिमुक्त गांव' का प्रस्ताव रखा, तो बाबासाहेब बोधक के अनुमोदन के साथ पूरा गांव एक सुर में इस फैसले के साथ खड़ा हो गया.सौदाला महाराष्ट्र का ऐसा पहला गांव बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर खुद को जातिमुक्त घोषित किया है.

सौदाला गांव ने पेश की नई मिसाल 

गांव ने साबित कर दिया कि ग्रामसभा के पास सामाजिक और नैतिक बदलाव लाने की असीम शक्ति है.जहां आज भी देश के कई हिस्सों में जातिगत संघर्ष की खबरें आती हैं, वहां सौदाला ने सामाजिक एकता का नया पाठ पढ़ाया है. ग्रामीणों का मानना है कि विकास के लिए गांव का मानसिक रूप से एकजुट होना जरूरी है.सौदाला की यह पहल अब न केवल महाराष्ट्र,बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन गई है.

 अहमदनगर से सुनील दवांगे की रिपोर्ट

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