महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे राज्य में एनालॉग (Non-Dairy) पनीर के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत जारी किया गया है और राजपत्र में प्रकाशित होते ही तत्काल प्रभाव से लागू होगा.
35.4% नमूने नियमों के अनुरूप नहीं मिले
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच राज्यभर से पनीर के 308 नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए. इनमें से 109 नमूने (35.4 प्रतिशत) नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए. इनमें 79 नमूने सब-स्टैंडर्ड और 30 नमूने असुरक्षित (Unsafe) घोषित किए गए. जांच में कई नमूनों में दूध की प्राकृतिक वसा के स्थान पर वनस्पति तेल और अन्य गैर-डेयरी तत्वों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई.
.आखिर क्या है एनालॉग पनीर?
FDA के मुताबिक एनालॉग पनीर में दूध से बनने वाले तत्वों की जगह नॉन-डेयरी पदार्थों का उपयोग किया जाता है. इसमें वेजिटेबल फैट की मात्रा अधिक होती है. विभाग का कहना है कि इस उत्पाद के लिए स्पष्ट खाद्य मानक तय नहीं हैं. इसी वजह से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.
मुंढे ने बताया कि खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 30(2A) के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है. यह आदेश एनालॉग पनीर का उत्पादन करने वाले, प्रोसेसिंग करने वाले, परिवहन करने वाले और बेचने वाले सभी लोगों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा.
दो महीने में हजारों प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई
FDA की ओर से 25 मई 2026 से 31 जुलाई 2026 के बीच चलाए गए विशेष अभियान में बड़े पैमाने पर जांच और कार्रवाई की गई. इस दौरान राज्यभर में 3137 प्रतिष्ठानों की जांच की गई. जांच के बाद 764 प्रतिष्ठानों को कमियां दूर करने के लिए नोटिस जारी किए गए जबकि 165 लाइसेंस निलंबित कर दिए गए. इसके अलावा 28 लाख 66 हजार 96 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई.
होटल और खाने-पीने के प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में
अभियान के तहत 890 होटल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया. इनमें 329 संचालकों को सुधार संबंधी नोटिस दिए गए जबकि 116 लाइसेंस निलंबित किए गए. FDA के अनुसार जब्त की गई खाद्य सामग्री की कुल कीमत 55 करोड़ 72 लाख रुपये आंकी गई है. विभाग का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और आने वाले समय में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे. तुकाराम मुंढे की इस कार्रवाई को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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