
महाराष्ट्र में ठाणे जिले की एक अदालत ने अपनी महिला मित्र से दुष्कर्म और धोखाधड़ी करने के आरोपी युवक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. रचना टेहरा ने शुक्रवार को जारी आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा, इसलिए आरोपी को रिहा करने की जरूरत है. अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया, घटना के समय पीड़िता और युवक की उम्र 21 वर्ष थी, दोनों पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में एक ही गांव में रहते थे और 2014 में एक साथ कॉलेज जाते थे.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और आरोपी ने अलग-अलग मौकों पर महिला से कथित तौर पर दुष्कर्म किया और उससे शादी करने का वादा किया. दोनों कुछ समय के लिए ‘लिव-इन रिलेशनशिप' में भी थे.
बाद में महिला नर्सिंग का कोर्स करने नासिक चली गई, जब वह वापस लौटी तो उसे पता चला कि आरोपी ने दूसरी महिला से शादी कर ली है, जिसके बाद महिला ने उसके खिलाफ शिकायत दायर की.
वहीं, आरोपी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता सुखदेव पंढारे ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को मामले में फंसाया गया है.
अधिवक्ता के मुताबिक, न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने में विफल रहा है, इसलिए उसे रिहा करने की जरूरत है.
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