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गोकुल डेयरी चुनाव विवाद पर फडणवीस बोले: सरकार नहीं देगी दखल, दोनों गुट आपस में करें सुलह

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोकुल डेयरी चुनाव विवाद पर कहा कि अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी भी गुट के पास कोरम पूरा करने लायक संख्या नहीं है. वैधानिक संकट दूर करने के लिए नामित सदस्यों का प्रावधान लाया गया है और सरकार का गोकुल पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है.

गोकुल डेयरी चुनाव विवाद पर फडणवीस बोले: सरकार नहीं देगी दखल, दोनों गुट आपस में करें सुलह
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  • महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोकुल डेयरी चुनाव विवाद में सरकार का स्पष्ट पक्ष रखा है
  • अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी भी गुट के पास सभा का कोरम पूरा करने लायक संख्या नहीं है
  • कोरम की कमी के कारण सदस्यों को नामित करने का प्रावधान लागू किया गया है ताकि वैधानिक समस्या हल हो सके

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गोकुल डेयरी चुनाव विवाद पर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया. नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए किसी भी गुट के पास कोरम पूरा करने लायक संख्या नहीं है. इसी वैधानिक समस्या को दूर करने के लिए सदस्यों के नामांकन का प्रावधान किया गया है. फडणवीस ने कहा कि सरकार की गोकुल पर कब्जा करने की कोई मंशा नहीं है और यदि दोनों गुट आपसी सहमति बना लें तो हस्तक्षेप की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी.

गोकुल चुनाव विवाद पर सीएम का स्पष्टीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोकुल डेयरी चुनाव के बाद अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए दोनों में से किसी भी गुट के पास सभा का कोरम पूरा करने लायक पर्याप्त मत नहीं हैं. कोरम पूरा न होने की स्थिति में अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि इसके बाद अधिकार डीडीआर (DDR) के पास चले जाते हैं. इसी वैधानिक समस्या के समाधान के लिए सदस्यों को नामित करने का प्रावधान लाया गया है. सरकार का उद्देश्य किसी भी तरह से गोकुल पर नियंत्रण हासिल करना नहीं है. यदि दोनों गुट आपस में सहमति बना लें तो सरकार को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं होगी.

फडणवीस ने पूर्व न्यायाधीश भूषण गवई की राय पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यह राय सतेज पाटिल द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर आधारित है. उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि दोनों गुटों के पास कोरम पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है. इसलिए यह एकतरफा तथ्यों पर आधारित राय है. हालांकि अदालत अपना फैसला लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नामित सदस्यों को लेकर लिया गया फैसला महायुति के चारों घटक दलों के नेताओं की मौजूदगी में कैबिनेट ने लिया था. एडवोकेट जनरल और कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही सुनेत्रा पवार, एकनाथ शिंदे और मेरे हस्ताक्षरों के साथ यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया. इसमें किसी की नाराजगी का कोई प्रश्न नहीं है.

एनसीपी के मुद्दे पर भी बोले

एनसीपी से जुड़े प्रश्न पर फडणवीस ने कहा कि इस विषय पर शरद पवार, सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेता आपस में बैठकर निर्णय लेंगे. महायुति का सबसे बड़ा दल होने के नाते जब वे अपना अंतिम फैसला बताएंगे, तब हम उस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे. इस मामले में हस्तक्षेप करना हमारे लिए उचित नहीं होगा. 

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