एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को शनिवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जहां वे पिछले तीन दिनों से भर्ती थे और उनका इलाज चल रहा था. शरद पवार अब अस्पताल के पास स्थित अपने आवास पर लौट आए हैं, जहां उनका इलाज जारी रहेगा. उनका इलाज कर रहे डॉक्टर, डॉ. प्रतीत समदानी ने कहा, "शरद पवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. उन्हें ब्रोंकाइटिस, सीने में संक्रमण और खांसी की दिक्कत थी. अब उनकी हालत स्थिर है और घर पर ही इलाज जारी रहेगा."
सुनेत्रा पवार की गैर-मौजूदगी और प्रफुल्ल पटेल के वायरल वीडियो ने NCP के विलय की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है. सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने शरद पवार से मिलने के लिए तीन बार वक्त मांगा था, लेकिन वे अस्पताल में उनसे मिलने नहीं पहुंचीं. उनकी इस गैर-मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे वक्त में जब NCP के दोनों गुटों के बीच विलय की अटकलें तेज हो रही हैं.
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शरद पवार को फोन करके उनका हाल-चाल लिया. इसके बाद NCP सांसद प्रफुल्ल पटेल, मंत्री छगन भुजबल और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई प्रमुख हस्तियों और राजनीतिक नेताओं ने अस्पताल जाकर उनसे मुलाकात की.
हालांकि, प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात का एक वायरल वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है. वीडियो में दोनों नेताओं को 10 नवंबर के बाद एक संभावित मुलाकात पर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है, जिसमें शरद पवार ने सुझाव दिया है कि वे उस तारीख के बाद एक साथ बैठें. इस बातचीत ने लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ा दी है कि 10 नवंबर के एजेंडे में क्या है, खासकर तब जब विलय की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं. इसी बीच, महाराष्ट्र एनसीपी चीफ सुनील तटकरे ने भी यह माना कि दिवंगत अजित पवार के जिंदा रहते हुए दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर बातचीत हुई थी.
सुनील तटकरे ने क्या कहा?
शुक्रवार को महाराष्ट्र एनसीपी चीफ सुनील तटकरे ने माना कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के जिंदा रहते हुई थी. उन्होंने आगे दावा किया कि अगर अजित पवार जिंदा होते, तो 12 फरवरी को यह विलय औपचारिक रूप से हो गया होता.
तटकरे ने कहा, "जब अजित दादा जिंदा थे, तब विलय को लेकर निश्चित रूप से बातचीत हुई थी. उन्होंने यह भी रूपरेखा तय कर दी थी कि विलय कैसे होगा. अगर अजित दादा आज हमारे बीच होते, तो 12 फरवरी को यह विलय हो गया होता."
उन्होंने आगे बताया कि अजित पवार ने खुद उन्हें विलय की बातचीत और प्रस्तावित प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी थी, क्योंकि वे दिवंगत नेता के काफी करीबी थे.
क्या 10 नवंबर के बाद विलय को लेकर बातचीत का एक और दौर हो सकता है? और क्या अस्पताल में भर्ती शरद पवार से सुनेत्रा पवार की मुलाकात न होने के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदर्भ है? इन सवालों ने एनसीपी के विलय पर फिर से शुरू हुई बहस को एक नया मोड़ दे दिया है.
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