महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाल ही में IAS तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में मुंबई के कई वीवीआईपी क्लबों और सरकारी कैंटीनों में औचक निरीक्षण किया था. जांच के दौरान MCA परिसर में चल रहे पांच बड़े फूड आउटलेट्स में गंदगी मिली थी. जिसके बाद पांच कैंटीनों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे. यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में पहुंचा था. जिस पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने MCA से सवाल किया है कि हमारे खिलाड़ियों को 'मांसाहारी चाय' पिलाई जा रही है, आपको इसकी जानकारी है या नहीं?. कोर्ट ने इसे खिलाड़ियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया है. अदालत ने एमसीए को निर्देश दिया है कि वह अपनी सभी कैंटीनों को पूरी तरह से साफ रखे.
कैंटीनों के लाइसेंस निलंबित हुए थे
बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ एमसीए की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एफडीए के उस फैसले को चुनौती दी गई थी. जिसमें पांच कैंटीनों के लाइसेंस निरस्त किए गए थे. एमसीए के वकील विक्रम नानकानी ने कहा कि FDA को पहले नोटिस जारी करना चाहिए था, ताकि भोजनालयों को कमियों को दूर किया जा सके. जिस पर हाईकोर्ट ने कहा 'रेस्तरां के किचन में मक्खियां और कॉकरोच रेंग रहे हैं, यह एक तरह की मांसाहारी चाय है. क्या वहां आने वाले क्रिकेटर्स और मेहमानों को अंदाजा भी है कि वे किस तरह की चाय का सेवन कर रहे हैं?.
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कैंटीनों में बेहद गंदगी थी
अदालत ने कहा एफडीए की रिपोर्ट के अनुसार भोजनालय की रसोई में कॉकरोज और मक्खियां भरी हुई थीं, जबकि फर्श फिसलन भरा और गंदा था. जो स्वच्छता मानकों का घोर उल्लंघन है. इसलिए एफडीए तत्काल लाइसेंस निलंबित करने का निर्णय ले सकता है. हाईकोर्ट ने साफ किया कि वीवीआईपी हो या आम जनता, खाद्य सुरक्षा के नियमों से कोई समझौता नहीं हो सकता.
कोर्ट ने महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में की जा रही इस सख्त कार्रवाई की जमकर सराहना की है. मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त 2026 को होगी.
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