महाराष्ट्र में जारी महानगरपालिका चुनावों के बीच कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व वाली महायुति पर लोकतंत्र को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है. महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने कहा कि सत्ता की भूख में सत्ताधारी गठबंधन धनबल, दबाव और धमकियों का सहारा लेकर विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से बाहर कर रहा है. इसी के साथ कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की है कि जहां उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा रहे हैं, वहां मतदाताओं को NOTA (नोटा-इनमें से कोई नहीं) का विकल्प दिया जाए.
निर्विरोध चुनाव लोकतंत्र के लिए खतरा
कांग्रेस का कहना है कि बिन विरोध जीत जनसमर्थन का संकेत नहीं, बल्कि विपक्ष को दबाने की साजिश है. सपकाळ ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल जीतने का नहीं, बल्कि मतदाताओं को असहमति जताने का अधिकार देने का माध्यम भी होता है. “संविधान ने मतदाताओं को NOTA का अधिकार दिया है. अगर सत्ताधारी दल दबाव बनाकर चुनाव निर्विरोध करा रहे हैं, तो भी जनता को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए,” उन्होंने कहा.
राज्य चुनाव आयोग से सीधी मांग
कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग से मांग की है कि वह चुनाव प्रक्रिया में बदलाव कर निर्विरोध सीटों पर भी NOTA का विकल्प उपलब्ध कराए. पार्टी का तर्क है कि इससे दबाव और धमकी की राजनीति पर अंकुश लगेगा और जनता का लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहेगा.
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि NOTA का विकल्प सत्ताधारी दलों के लिए एक नैतिक चेतावनी साबित होगा और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाएगा.
'फ्री एंड फेयर' चुनाव व्यवस्था पर हमला
सपकाळ ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना के विपरीत कराए जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान से पहले ही “घोड़ाबाजार” शुरू हो चुका है और भाजपा महायुति की सत्ता की भूख लोकतंत्र को निगलने तक पहुंच गई है. “महानगरपालिका चुनावों में 'बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया' का खेल खुलेआम चल रहा है. विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका जा रहा है, उन्हें धमकियां दी जा रही हैं और पुलिस व प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है,” सपकाळ ने कहा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इन घटनाओं पर मूकदर्शक बना हुआ है.
राहुल नार्वेकर पर गंभीर आरोप
सपकाळ ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि नार्वेकर ने अपने संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और महानगरपालिका चुनावों में अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया है.
कांग्रेस ने दावा किया कि विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाने और नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने के मामलों में पर्याप्त सबूत, सीसीटीवी फुटेज और शिकायतें मौजूद हैं. इसके बावजूद चुनाव आयोग की जांच को उन्होंने “शब्दों का खेल” करार दिया. कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मांग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर नार्वेकर को पद से हटाएं.
महायुति में 'नूरा कुश्ती' का आरोप
सत्ताधारी महायुति के भीतर चल रहे मतभेदों पर टिप्पणी करते हुए सपकाळ ने कहा कि गठबंधन के तीनों दल एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगा रहे हैं, लेकिन वास्तव में यह सब “नूरा कुश्ती” है. उन्होंने कहा कि यदि सहयोगी दल गंभीर हैं, तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार को या तो सरकार से बाहर आना चाहिए या भाजपा को उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए.
लोकतंत्र की कसौटी
महानगरपालिका चुनावों के बीच कांग्रेस ने NOTA की मांग को एक लोकतांत्रिक सुधार के रूप में सामने रखा है. पार्टी का कहना है कि जबरन कराए गए निर्विरोध चुनाव जनता का भरोसा तोड़ते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करते हैं. अब सभी की नजरें राज्य चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाता है.
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