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BMC में हर दूसरा वोट बीजेपी को मिला, 89 सीटों के साथ नया रिकॉर्ड, पढ़ें महाविजय की इनसाइड स्टोरी

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं. बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन असली कहानी उन 29 सीटों में छिपी है, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने जीती हैं.

BMC में हर दूसरा वोट बीजेपी को मिला, 89 सीटों के साथ नया रिकॉर्ड, पढ़ें महाविजय की इनसाइड स्टोरी
  • भाजपा ने बीएमसी चुनाव में 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर मुंबई में पहली बार मेयर पद हासिल किया है
  • शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं जबकि एकनाथ शिंदे के गुट ने 29 सीटें जीतकर भाजपा को समर्थन दिया है
  • कांग्रेस ने 24 सीटें जीती हैं और अल्पसंख्यक एवं झुग्गी बस्तियों में अपना कोर वोट बैंक मजबूत रखा है
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मुंबई:

बीजेपी ने जब 1985 में पहली बार बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव लड़ा, तो कभी सोचा नहीं होगा कि उनका कभी मेयर भी मुंबई में होगा. हालांकि, पहले चुनाव में प्रदर्शन बहुत अच्‍छा नहीं रहा था. इसके बाद 1992 के बीएमसी चुनाव में सिर्फ 14 सीटें जीतीं, तो शिवसेना के साथ मिलकर आगे बढ़ना शुरू किया. अब 41 साल बाद पहली बार बीजेपी का बीएमसी में मेयर बनने जा रहा है. ठाकरे परिवार का मुंबई का किला आखिरकार ढह गया है. बीएमसी की नई बॉस अब बीजेपी है. बीएमसी की 227 सीटों के शुक्रवार को आए परिणाम ने ठकरे ब्रदर्स को चौंका दिया. बीजेपी ने 89 सीटे जीतकर बता दिया कि मुंबई में अब उनकी बादशाहत होगी. बीजेपी का वोट प्रतिशत 45.22 रहा. बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने वाली एकनाथ शिंदे की शिवसेना के खाते में 29 सीटें आई. महायुति ने चुनाव में 118 सीटें जीतकर बीएमसी में मेयर पद अपने नाम कर लिया है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ 65 सीटें जीत पाई. 

किस पार्टी को कितना प्रतिशत वोट?

बीजेपी ने बीएमसी चुनाव में 45.22% वोट के साथ 89 सीटें जीती हैं. बीजेपी को कुल 1,17,9,273  वोट मिले हैं. शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं और उनका वोट प्रतिशत 27.52 रहा है. उद्धव ठाकरे को 71,7,736 वोट मिले हैं. शिंदे सेना को 29 सीटें मिली हैं और उनका वोट प्रतिशत 10.48 रहा है. कांग्रेस का वोट प्रतिशत 9.31 रहा और उसे 24 सीटें मिली हैं.      

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BMC में बीजेपी की जीत का राज

बीएमसी के लिए हुए चुनाव में बहुकोणीय लड़ाई, विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) खेमे में टकराव और विरोधियों के बीच एक ठोस रणनीति का अभाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने में मददगार साबित हुआ. अब पहली बार देश के सबसे अमीर नगर निकाय में उसका मेयर होगा. विश्लेषकों का कहना है कि इस हार ने एमवीए के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है. शिवसेना(यूबीटी)और कांग्रेस, दोनों प्रमुख साझेदारों के खराब प्रदर्शन की वजह से सत्तारूढ़ ‘महायुति' गठबंधन के विश्वसनीय विकल्प होने का गठबंधन का दावा खोखला प्रतीत होता जा रहा है. 

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बिना धनुष-बाण के मुमकिन नहीं बीजेपी का मेयर!

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं. बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन असली कहानी उन 29 सीटों में छिपी है, जो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने जीती हैं. आंकड़ों का गणित ऐसा उलझा है कि बिना शिंदे के 'धनुष-बाण' के बीजेपी का मेयर बनना नामुमकिन है. बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा चाहिए। बीजेपी के पास 88 सीटें हैं, यानी उसे अभी भी 26 और पार्षदों की जरूरत है, शिंदे की 29 सीटें ही बीजेपी को सत्ता की कुर्सी तक पहुँचा सकती हैं.

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किस पार्टी को कितनी सीट मिलीं?

  • बीजेपी बीएमसी चुनाव में 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से अब भी दूर है. बीजेपी को मेयर की चेयर तक पहुंचने के लिए शिवसेना (शिंदे गुट) का समर्थन लेना ही पड़ेगा.
  • शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीती हैं, उद्धव ठाकरे का प्रदर्शन खराब नहीं कहा जा सकता, क्‍योंकि पार्टी के दो फाड़ के बाद ये प्रदर्शन चौंकाने वाला है. पिछले चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें पर जीत दर्ज की थी. 
  • शिवसेना ( शिंदे गुट) ने सिर्फ 29 सीटे भले ही जीती हैं, लेकिन वह इस समय किंगमेकर की भूमिका में है. एकनाथ शिंदे के बिना बीजेपी का मेयर बनना असंभव है. 
  • कांग्रेस अपनी अस्तित्‍व की लड़ाई लड़ रही है और 24 सीटें जीत उसने दिखा दिया कि अभी वह खत्‍म नहीं हुई है. कांग्रेस बीएमसी में अकेले लड़कर अपनी पारंपरिक पॉकेट्स और अस्तित्व बचाने में कामयाब रही.  
  • असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 8 सीटें जीती हैं और मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पैठ मजबूत कर अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है.
  • राज ठाकरे की महाराष्‍ट्र नवनिर्माण पार्टी को सिर्फ 6 सीटें मिली है, जिससे पता चलता है कि उनका जादू बेअसर रहा है. एमएनएस मुंबई की राजनीति में हाशिए पर सिमटती दिख रही है.
  • अजित पवार की एनसीपी को सिर्फ 3 सीटें बीएमसी में मिल पाई, ये दिखाता है कि मुंबई महानगर में पार्टी का आधार अब भी बेहद कमजोर है. 
  • समाजवादी पार्टी के हाथ बीएमसी चुनाव में सिर्फ 2 सीट लगी हैं, पार्टी अब कुछ व्यक्तिगत प्रभाव वाली सीटों तक सीमित रह गई है. महाराष्‍ट्र में उत्‍तर भारतीयों के मुद्दों पर राजनीति करने वाली पार्टी को अब वो समर्थन नहीं मिल रहा है.  
  • शरद पवार की एनसीपी को बीएमसी चुनाव में सिर्फ 1 सीट मिली है. पार्टी के कार्यकर्ता मुंबई नगर निगम में अपना खाता खोलना ही इस वक्त सबसे बड़ी उपलब्धि मान रहे होंगे.
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कंग्रेस के प्रदर्शन ने चौंकाया! 

बीएमसी चुनाव में कांग्रेस को किसी से कोई उम्‍मीद नहीं है. प्रमुख साथियों ने साथ लगभग छोड़ दिया था. ऐसे में लग रहा था कि कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहेगा. दूसरी आगर महायुति की लहर भी थी, लेकिन कांग्रेस का इन चुनावों में ठीक-ठाक प्रदर्शन रहा है. कांग्रेस ने 'एकला चलो' की राह पर 24 सीटों के साथ मौजूदगी दर्ज कराई है. हालांकि, 2017 के बीएमसी चुनावों में कांग्रेस 31 सीटों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी बनी थी. इस बार कांग्रेस का आंकड़ा 24 छूता दिख रहा है. हालांकि यह पिछली बार की तुलना में कुछ सीटों की गिरावट दर्शाता है, लेकिन महायुति की लहर के बावजूद, मौजूदा त्रिकोणीय और जटिल राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. अल्पसंख्यक और झुग्गी-बस्तियों वाले इलाकों में कांग्रेस का कोर वोट बैंक काफी हद तक पार्टी के साथ जुड़ा दिख रहा है. पार्टी ने बड़े राजनीतिक विवादों के बजाय स्थानीय नागरिक सुविधाओं और वार्ड-स्तरीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रखा, जो कुछ चुनिंदा वार्डों में जीत दिलाने में सफल रहा.

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