महाराष्ट्र में 75 शैक्षणिक संस्थानों को आनन-फानन में 'अल्पसंख्यक दर्जा' देने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में प्रमाणपत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले अल्पसंख्यक विकास विभाग के उपसचिव मिलिंद शेणॉय का तुरंत तत्काल तबादला कर दिया गया है और सचिव रुचेश जयवंशी भी जांच के घेरे में आ गए हैं. सूत्रों का कहना है कि आगामी अधिवेशन से पहले कुछ और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है और निलंबन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.
जानकारी के मुताबिक, पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद घोषित राजकीय शोक के दौरान अल्पसंख्यक विकास विभाग ने 75 शैक्षणिक संस्थानों को आनन-फानन में ‘अल्पसंख्यक दर्जा' प्रमाणपत्र जारी कर दिए. चौंकाने वाली बात यह है कि जो फाइलें कई महीनों से लंबित थीं, उन्हें शोक के महज 3–4 दिनों के भीतर डिजिटल रूप से निपटा दिया गया.
राज्य सरकार ने मिलिंद शेणॉय का किया तबादला
सूत्रों के अनुसार, पहला प्रमाणपत्र अजित पवार के निधन के कुछ ही घंटों बाद जारी किया गया था. इन प्रमाणपत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले उपसचिव मिलिंद शेणॉय का तुरंत तत्काल तबादला कर दिया गया है और फिलहाल उन्हें कोई नई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.
इस पूरे प्रकरण में अब अल्पसंख्यक विभाग के सचिव रुचेश जयवंशी की भूमिका भी जांच के घेरे में है. मुख्यमंत्री ने मामले की उच्च स्तरीय और तटस्थ जांच के आदेश दिए हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इतनी तेजी से प्रमाणपत्र जारी करने के पीछे क्या कारण थे.
CM फडणवीस ने सभी 75 प्रमाणपत्रों पर लगाई रोक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फिलहाल सभी 75 प्रमाणपत्रों पर रोक लगा दी है. वहीं मौजूदा अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने भी कहा है कि पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी.
जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या इन प्रमाणपत्रों को जारी करने के लिए किसी बाहरी दबाव या आर्थिक लेनदेन का सहारा लिया गया और शोक काल के दौरान इतनी सक्रियता कैसे दिखाई गई.
सचिव रुचेश जयवंशी पहले भी कुछ प्रशासनिक निर्णयों के कारण चर्चा में रहे हैं, इसलिए आगामी अधिवेशन में इस मुद्दे पर कुछ और अधिकारियों के निलंबन की संभावना है.
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