Dhamtari viral Video: छत्तीसगढ़ के धमतरी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने खाकी धारियों की कार्यप्रणाली और उनके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दो दिनों तक जिस मामले पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा, वह एक वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही अचानक सुर्खियों में आ गया है. आरोप है कि देर रात अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घर लौट रहे एक युवक के साथ पुलिसकर्मियों ने न केवल बदसलूकी की, बल्कि मारपीट भी की.
यह पूरी घटना 5 जून की रात करीब 1 बजे की बताई जा रही है, जो धमतरी के अर्जुनी थाना क्षेत्र के मुजगहन पोटियाडीह बाईपास के पास की बताई जा रही है. स्थानीय स्तर पर दो दिनों से इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे थे, लेकिन पुलिसिया विभाग ने तब तक इस मामले को संज्ञान में लेने की जरूरत महसूस नहीं की, जब तक कि घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल नहीं हो गया.
धमतरी युवक के साथ मारपीट के मामले में जिला SP का कहना है कि मामले की जांच के लिए तीन डीएसपी की एक टीम बनाई गई है pic.twitter.com/fHueuUptJj
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) June 8, 2026
चेकिंग के दौरान मोबाइल निकाला तो भड़क उठे थानेदार!
पीड़ित युवक के मुताबिक, वह रात के समय अपने परिवार के साथ सिनेमाघर से फिल्म देखकर वापस अपने घर लौट रहा था. इसी दौरान मुजगहन बाईपास के पास पुलिस की टीम ने उसकी मोटरसाइकिल को रोका. युवक का आरोप है कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने चेकिंग के नाम पर उनके साथ बहुत रूखा और अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया. जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा, तो युवक ने पुलिस के इस व्यवहार का सबूत रखने के लिए अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. बस, यही बात खाकी को नागवार गुजरी. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अर्जुनी थाना प्रभारी चंद्रकांत साहू और दूसरे पुलिसकर्मियों के साथ युवक की तीखी बहस हो रही है. आरोप है कि वीडियो बनाने से नाराज होकर थाना प्रभारी ने युवक के साथ मारपीट भी की.
'नंबर प्लेट टूटी थी, दस्तावेज में गड़बड़ी का दावा'
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर पुलिस ने एक अलग कहानी गढ़ ली है. धमतरी सिटी डीएसपी (City SP) अभिषेक चतुर्वेदी का कहना है कि रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच एक मोटरसाइकिल धमतरी शहर की ओर से आ रही थी. उसकी सामने की नंबर प्लेट टूटी हुई थी, जिसकी वजह से वहां तैनात जवानों ने उसे रोका. इस दौरान बाइक पर एक महिला और बच्चा भी थे. जब पूछताछ की गई, तो बाइक चालक ने सहयोग नहीं किया और वह आक्रामक हो गया.
पुलिस का यह भी दावा है कि गाड़ी दुर्ग पासिंग (CG 07) की थी और युवक के पहचान पत्र व गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के विवरण में कई खामियां थीं. पुलिस के मुताबिक, स्थिति को संभालने के लिए थाना प्रभारी को मौके पर बुलाया गया. हालांकि, बाद में युवक के स्थानीय होने की पुष्टि होने के बाद दस्तावेज लेकर थाने आने की बात कहकर जाने दिया गया था.
दो दिनों तक पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
पुलिस की इस दलील के बाद भी कई ऐसे बुनियादी सवाल हैं, जो इस पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बनाते हैं. अगर युवक संदिग्ध था, उसके दस्तावेजों में हेरफेर थी या किराएदार के रूप में उसका सत्यापन नहीं हुआ था, तो पुलिस ने 5 जून को ही मौके पर या थाने ले जाकर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की? मामले को दो दिनों तक ठंडे बस्ते में क्यों रखा गया? क्या पुलिस सिर्फ इसलिए हरकत में आई, क्योंकि वीडियो सोशल मीडिया पर आ गया और खाकी की साख पर बट्टा लगने लगा? इससे ये साबित होता है कि अगर वीडियो वायरल न होता, तो शायद यह मामला कभी फाइलों से बाहर ही नहीं आ पाता.
तीन DSP स्तर के अधिकारी करेंगे जांच
अब जब चौतरफा दबाव बढ़ा और जनता का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूटने लगा, तो धमतरी पुलिस महकमा अचानक 'डैमेज कंट्रोल' मोड में आ गया है. धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जांच के आदेश दे दिए हैं. इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए तीन डीएसपी रैंक के अधिकारियों की एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है.
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वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों के साथ-साथ संबंधित युवक को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. इसके अलावा, युवक के मकान मालिक को भी किराएदार का वेरिफिकेशन न कराने के एवज में नोटिस देने की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच के आधार पर कार्रवाई होगी.
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क्या कैमरा ऑन करना गुनाह है?
यह मामला सिर्फ धमतरी के एक बाईपास पर हुई झड़प का नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों और पुलिस के अहंकार के बीच की लड़ाई का है. पुलिस को देर रात चेकिंग करने का पूरा हक है. नंबर प्लेट टूटी हो, तो चालान काटने का अधिकार है और संदिग्ध लगने पर दस्तावेज मांगने का भी नियम है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई आम नागरिक अगर पुलिस की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता के लिए कैमरा ऑन कर लेता है, तो क्या वह पुलिस को उकसाने का हथियार बन जाता है? क्या एक रूटीन चेकिंग को डराने-धमकाने के अखाड़े में तब्दील किया जा सकता है? कमेटी यह तय कर देगी कि गलती किसकी थी, लेकिन इस घटना ने पुलिसिया सिस्टम की नीयत और उसकी संवेदनशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है.
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