- उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ.
- टेंडर की तारीख अब तक चार बार बढ़ चुकी है.
- आखिरी तिथि 14 जुलाई से बढ़ाकर 12 अगस्त की गई, प्रोजेक्ट लागत 2721 करोड़, दो पैकेज में बनेगा फोरलेन.
मध्य प्रदेश के मालवा अंचल का उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन प्रोजेक्टर फिर अधर में लटकता दिख रहा है. इसका अभी तक निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है. इसके टेंडर की तारीख लगातार बढ़ रही है और ऐसा अब तक चार बार हो चुका है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल इस परियोजना को मंजूरी दी थी. यह फोरलेन करीब 2,721 करोड़ रुपये में पूरा होना है.
उस समय गडकरी ने इस प्रोजेक्ट को सिंहस्थ-2028 की सौगात बताया था. घोषणा के समय उम्मीद जताई गई थी कि यह सड़क धार्मिक पर्यटन, व्यापार, उद्योग और मध्यप्रदेश-राजस्थान की कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल देगी. लेकिन घोषणा के लगभग एक वर्ष बाद भी हालात यह हैं कि निर्माण एजेंसी तक तय नहीं हो सकी है. बार-बार टेंडर की तारीख बदलने से लोगों में भ्रम, नाराजगी और अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है.
14 जुलाई से बदल रही है तारीख
परियोजना को लेकर नई उम्मीद तब जगी, जब 10 जुलाई को देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. महेंद्र सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया से जानकारी दी कि 14 जुलाई को टेंडर खुलेंगे. उनका कहना था कि निर्माण एजेंसी का चयन कर काम शुरू हो जाएगा और एक साल में सड़क बन जाएगी. उनके इस बयान से क्षेत्र के लोग बहुत खुश थे, लेकिन कुछ दिनों में उम्मीद फिर धुंधली पड़ गई.
NHAI की आधिकारिक टेंडर वेबसाइट पर संशोधन जारी हुआ और टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई से बढ़ाकर 21 जुलाई कर दी गई. इसके बाद यह तारीख 28 जुलाई पहुंची और अब एक बार फिर संशोधन करते हुए 12 अगस्त कर दी गई है. लगातार बढ़ती डेडलाइन ने लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है?
बार-बार बदलती तारीखों ने बढ़ाया अविश्वास
कई महीनों से फोरलेन परियोजना की टेंडर प्रक्रिया बदलाव हो रहा है. कभी आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ जाती है तो कभी तकनीकी प्रक्रिया के नाम पर टेंडर की तारीख बदल जाती है. इससे लोगों में यह धारणा बन गई है कि यह योजना शायद फाइलों में रह जाए और धरातल पर न उतरे.
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि जिस सड़क का वर्षों से इंतजार किया जा रहा है, उसमें बार-बार तारीख बदलना लोगों की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ जैसा महसूस होने लगा है. हाल ही में राजगढ़ संसदीय क्षेत्र के सांसद रोडमल नागर ने भी कहा था कि बड़े प्रोजेक्ट में समय लगता है, लेकिन क्षेत्र के लोग अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम शुरू होते देखना चाहते हैं.
सिंहस्थ-2028 की तैयारी का अहम हिस्सा
उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन (Ujjain-Jhalawar Four-lane Highway) केवल एक सड़क नहीं, बल्कि सिंहस्थ-2028 (Simhastha-2028) की तैयारियों की रीढ़ मानी जा रही है. इस मार्ग के बनने से उज्जैन स्थित महाकाल लोक और विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी शक्तिपीठ, नलखेड़ा के बीच तेज और सुरक्षित संपर्क स्थापित होगा. सिंहस्थ के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा.
इसके अलावा यह सड़क मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच व्यापार, पर्यटन, कृषि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति देने का काम करेगी.
'मौत के हाईवे' से मिलेगा छुटकारा
फिलहाल उज्जैन-झालावाड़ मार्ग ज्यादातर दो लेन में है. आगर-मालवा जिले में तो ज्यादा ब्लैक स्पॉट और खतरनाक मोड़ मौजूद हैं, जो मौत को दावत देते हैं और एक्सीडेंट भी होते रहते हैं. सड़क के चौड़ीकरण से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि हादसों में भी कमी होगी.
दो पैकेज में बनेगा पूरा कॉरिडोर
- एनएचएआई ने इस परियोजना को दो हिस्सों में विभाजित किया है. पहले पैकेज में उज्जैन से आकली-कड़िया (खिलचीपुर के पास) तक लगभग 86.5 किलोमीटर सड़क का फोरलेन निर्माण किया जाएगा, जिस पर ₹1,462.19 करोड़ खर्च होंगे.
- दूसरे पैकेज में आकली-कड़िया से सुसनेर होते हुए राजस्थान के झालावाड़ जंक्शन तक 72.763 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,259.53 करोड़ है.
- पूरे कॉरिडोर में 6 फ्लाईओवर, कई बड़े पुल और 115 बॉक्स अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे यातायात अधिक सुरक्षित और निर्बाध होगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं