Twisha Sharma Murder Mystery: मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सच को सामने लाने के लिए सीबीआई ने अब पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर आधुनिकतम फॉरेंसिक और डिजिटल तकनीकों का सहारा लिया है. जांच एजेंसी कटारा हिल्स स्थित उस तीन मंजिला मकान के भीतर की हर एक हलचल को डिजिटल रूप से दोबारा रिक्रिएट कर रही है, ताकि 12 मई की रात के धुंधलके में छिपे सच को बेनकाब किया जा सके. इस पूरी कवायद का मकसद एक ऐसा वैज्ञानिक ढांचा तैयार करना है जिसे अदालत में चुनौती न दी जा सके.
वर्चुअल टाइमलाइन और ट्विशा का 'डिजिटल अवतार'
सीबीआई के तकनीकी विशेषज्ञ इस समय 'टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन' तकनीक पर काम कर रहे हैं. इसके तहत घटना की रात के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, घर के वाई-फाई लॉग्स, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और फॉरेंसिक मैपिंग को एक साथ जोड़कर एक वर्चुअल टाइमलाइन बनाई जा रही है. जांच एजेंसी असल में ट्विशा के जीवन के आखिरी चंद घंटों का एक 'डिजिटल अवतार' तैयार कर रही है, जिससे यह साफ हो जाएगा कि आखिरी वक्त में वह घर के किस हिस्से में थी, उस वक्त किसका मोबाइल सक्रिय था और इंटरनेट पर क्या गतिविधियां चल रही थीं.
जिम एरिया के वे 40 मिनट और गायब सीसीटीवी फुटेज का रहस्य
इस पूरी जांच का सबसे संवेदनशील केंद्र वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा कथित तौर पर तीसरी मंजिल पर बने जिम एरिया में गई थी और उसके बाद उसका शव नीचे लाया गया. सीबीआई इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि सार्वजनिक डोमेन में केवल चुनिंदा सीसीटीवी फुटेज ही क्यों सामने आए? ट्विशा के ऊपर जाने और नीचे लाए जाने के दृश्य तो दिखाई देते हैं, लेकिन उससे ठीक पहले और बाद के महत्वपूर्ण फुटेज गायब हैं. जांच टीम को अंदेशा है कि साक्ष्यों को जानबूझकर मिटाया गया या फिर रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की गई.
पुलिस रिकॉर्ड की कमियां और अस्पताल ले जाने की जल्दबाजी
तकनीकी जांच के दायरे में स्थानीय पुलिस की शुरुआती कार्रवाई भी आ गई है, क्योंकि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ट्विशा की लंबाई को लेकर कुछ गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं. सीबीआई यह पता लगा रही है कि यह महज एक क्लर्कियल गलती थी या फिर जांच की दिशा भटकाने का कोई सोची-समझी कोशिश. इसके साथ ही, यदि शव फंदे पर लटका था तो पुलिस के आने से पहले उसे नीचे किसने उतारा, और अस्पताल ले जाने से पहले दिए गए सीपीआर के पीछे की असल मंशा क्या थी—क्या यह केवल जान बचाने की कोशिश थी या फिर क्राइम सीन को पूरी तरह से डिस्टर्ब करने की एक चाल, इन सभी तकनीकी सवालों के जवाब अब डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए तलाशे जा रहे हैं.
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