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श्योपुर किसान हत्याकांड: कराहल TI-तहसीलदार पर गिरी गाज, जिला प्रभारी ने किया सस्पेंड

23 मई की शाम आदिवासी किसान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड के बाद आदिवासी समाज के लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने टीआई और तहसीलदार को हटाने की मांग की थी.

श्योपुर किसान हत्याकांड: कराहल TI-तहसीलदार पर गिरी गाज, जिला प्रभारी ने किया सस्पेंड
ग्रामीणों ने टीआई और तहसीलदार को हटाने की मांग की थी.

मध्य प्रदेश के श्योपुर के कराहल थाना प्रभारी यास्मीन खान और तहसीलदार रोशनी शेख पर गाज गिरी है. जिला प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला ने जमीन विवाद मामले में इन अफसरों की भारी लापरवाही मानते हुए ये कार्रवाई की है. दरअसल, श्योपुर जिले के कराहल थाना क्षेत्र के ग्राम पनवाड़ा में जमीन विवाद में आदिवासी किसान गंगाराम आदिवासी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि किसान गंगाराम आदिवासी ने जमीन पर दबंगों के कब्जे की शिकायत पुलिस-प्रशासन से की थी, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई. 

कराहल TI और तहसीलदार पर गिरी गाज

जिला प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला ने इस घटना में अफसरों की भारी लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया है. उन्होंने कराहल प्रभारी तहसीलदार रोशनी शेख और कराहल थाने की TI यास्मीन खान को सस्पेंड कर दिया है. वहीं निलंबन का आदेश जारी होने के बाद कलेक्टर ने कराहल की प्रभारी तहसीलदार रोशनी शेख को कलेक्ट्रेट में अटैच किया है, जबकि श्योपुर SP ने कराहल थाने की TI यास्मीन खान को महिला थाने में अटैच किया है. इसके अलावा प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला ने आदिवासियों की जमीन पर बाहरी लोगों और इलाके के दबंगों द्वारा किए गए जबरन कब्जे की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने का सख्त आदेश दिए हैं. 

आदिवासी किसान की हत्या के बाद अधिकारियों के खिलाफ एक्शन

बता दें कि 23 मई की शाम जब गंगाराम आदिवासी खेत पर काम कर रहे थे, उसी वक्त जमीन विवाद को लेकर उन्हें गोली मार दी गई. गंभीर हालत में उन्हें कराहल अस्पताल ले जाया गया, जहां से श्योपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. इस हत्याकांड से इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया था. आदिवासी समाज के लोगों ने शव का अंतिम संस्कार करने से पहले सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने कराहल थाना प्रभारी को हटाने और बाहरी लोगों के कथित फर्जी पट्टे निरस्त करने की मांग की थी. इसके अलावा आदिवासी समाज की जमीन का सीमांकन कर उसे कब्जा मुक्त कराने की मांग भी रखी थी. 

आदिवासी समाज के लोगों का आरोप था कि लंबे समय से विवादित जमीन को लेकर उन पर दबाव बनाया जा रहा था. हाल ही में प्रशासन ने इस जमीन का कब्जा जगवीर जाट को दिलाया था.

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