अक्सर सास बहू के रिश्ते को रूढ़िवादी तरीके से देखा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में दिग्मा गांव की सास-बहू की एक जोड़ी इस रिश्ते में बनाई गई धारणा को तोड़ती नजर आ रही है. दोनों ने मिलकर अपने घर को आर्थिक तौर पर न मजबूत किया है, बल्कि वह खुद आत्मनिर्भर बनकर एक प्रेरणा भी दे रही हैं. यहां तक इनकी तारीफ कलेक्टर ने भी की है. इसकी वजह से कि दोनों ने मिलकर फूलों की खेती (Floriculture) से पूरे गांव को प्रेरित किया है.
रत्ना मजूमदार (22) और उनकी सास शांति मजूमदार दोनों एक साथ खेतों में काम करती हैं. इन्होंने खेती के जरिए सरगुजा जिले को विभिन्न प्रकार के फूलों का उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में इतिहास रचा है. फूलों की खेती को उन्होंने अपनी आत्मनिर्भरता और पहचान का जरिया बनाया है.

जिला प्रशासन भी कर रहा सहायता
जिला प्रशासन भी उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज, सब्सिडी और अन्य तरह की सहायता कर रहा है, ताकि फूलों की खेती को बढ़ावा मिल सके. वैसे गांव में कृषि क्षेत्रों का परिदृश्य बदल रहा है. जब से रत्ना मजूमदार और उनकी सास ने पारंपरिक खेती की जगह फूलों की खेती शुरू की है, तब से गांव में अन्य लोग भी उनके तरीके को अपना रहे हैं.
#WATCH | Ambikapur, Chhattisgarh: The agricultural landscape in Digma village, located in the Ambikapur block of Surguja district, is undergoing a transformation. Colorful flowers have now replaced traditional crops in the fields. The district administration is also making… pic.twitter.com/cIbEmRZ8PP
— ANI (@ANI) July 6, 2026
शादी के बाद ससुराल को ऐसे बनाया आर्थिक समृद्ध
रत्ना जब शादी के बाद अपनी ससुराल डिग्मा गांव आई तो पता चला कि परिवार छोटे पैमाने पर फूलों की खेती कर रहा था, जिसमें उनके ससुर का हाथ था. उन्होंने अपने ससुर से प्रेरणा लेकर कुछ पौधों और सीमित संसाधनों से छोटे क्षेत्र में फूलों की खेती शुरू की. धीर-धीरे यह खेती एक उद्यम में बदल गई. इससे गांव के लोगों को रोजगार भी मिलने लगा और पैदावार के साथ आमदनी भी ठीक होने लगी.

पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा
जो मुनाफा फूलों की खेती में होने लगा वह धान और सब्जियों की पारंपरिक खेती के मुकाबले काफी कम था, इससे रत्ना से सास के साथ मिलकर फूलों की खेती का दायरा भी बढ़ाया. रत्ना ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए भी एक नया रास्ता प्रशस्त किया है.

फूलों की खेती में कई तरह के काम होते हैं, जिसके लिए अन्य लोगों की जरूरत पड़ती है. फूलों की तुड़ाई, उनकी देखभाल और पैकिंग के लिए मजदूरों को काम पर रखा जाता है, जिससे उसने इस खेती को एक छोटे उद्यम में बदल दिया है.
दो एकड़ में फूलों की खेती, मिलने हैं बाहर से ऑर्डर
युवा किसान रत्ना मजूमदार ने बताया कि पीक सीजन में उन्होंने शादियों, त्योहारों और कार्यक्रमों के लिए बड़े पैमाने पर फूलों के ऑर्डर मिलते हैं. इसके अलाव वह फूलों की आपूर्ती स्थानीय बाजार के साथ पड़ोसी जिलों में भी करती हैं. रत्ना ने आगे बताया कि फिलहाल दो एकड़ जमीन पर खेती की जा रही है और अब वे इस व्यवसाय को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.

बहू को लेकर क्या कहती हैं सास
रत्ना की सास शांति मजूमदार ने कहा कि रत्ना मजूमदार बहू के आने के बाद घर और खेतों दोनों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है. जहां पहले काम सीमित था, वहीं अब उसी जमीन पर आधुनिक कृषि पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है और परिवार पहले से कहीं अधिक आत्मनिर्भर हो गया है.
कलेक्टर भी चाह रहे फूलों की खेती बढ़े
सरगुजा के कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि स्थानीय बाजार में फूलों की मांग बहुत अधिक है, लेकिन फिर भी इन्हें दूसरे राज्यों से मंगवाना पड़ता है. ऐसे में, अगर स्थानीय उत्पादन बढ़ता है तो इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
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