Papa Rao Surrendered News: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच मंगलवार को एक बड़ी सफलता मिली. दरअसल, छत्तीसगढ़ में माओवाद का वर्तमान में सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले पापा राव (Papa Rao) ने मुख्यधारा में लौटने के लिए NDTV की टीम पर भरोसा जताया. पापा राव ने आत्मसमर्पण की इच्छा जताते हुए NDTV से संपर्क किया और सुरक्षित बाहर निकालने में सहयोग मांगा. इसके बाद एनडीटीवी संवाददाता विकास तिवारी ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा से उनकी बात कराई. इसके बाद सरकार से सुरक्षा का आश्वासन मिलने पर नक्सलियों की टीम समर्पण के लिए जंगल से निकली. इस दौरान NDTV की टीम दो दिनों तक घने जंगलों में उनके साथ मौजूद रही. इस दौरान पापा राव ने अपने उन साथियों को भी एकत्रित किया, जो उनसे बिछड़ गए थे.
इन नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया आसान नहीं थी. पापाराव ने इसके लिए NDTV की टीम से संपर्क किया और सहयोग मांगा. इसके बाद एनडीटीवी की टीम दो दिनों तक जंगलों में उनके साथ रही. इस दौरान पापाराव न केवल अपने बिछड़े साथियों से वापस मिले, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को सहयोग करते हुए तीन छिपे हुए हथियार डंप भी बरामद करवाए.

भारी मात्रा में हथियार और नकदी बरामद
बरामद किए गए डंप से सुरक्षाबलों को बड़ी मात्रा में हथियार और नकदी मिली है. इनमें 3 एके 47 राइफल, 303 राइफलें और लगभग 10 लाख रुपये नकद शामिल हैं. इसके अलावा, जब पापाराव और उनके साथी बाहर आए, तो उनके पास और भी हथियार मौजूद थे, जिनमें कई आधुनिक राइफलें और अन्य हथियार शामिल थे.
महिला और पुरुष कैडर सहित कुल 18 माओवादी शामिल
मुख्यधारा में लौटने वालों में पापा राव समेत कुल 18 माओवादी शामिल हैं, जिनमें 7 महिला कैडर और 11 पुरुष माओवादी शामिल है. इनमें पापाराव सबसे वरिष्ठ और प्रमुख चेहरा हैं. उनके साथ संगठन के विभिन्न स्तरों—डीवीसीएम, एसीएम और पार्टी सदस्य भी शामिल हैं.
जंगल से जगदलपुर तक ऐसे चली आत्मसमर्पण की प्रक्रिया
जब एनडीटीवी की टीम माओवादियों को लेकर नेशनल पार्क के जंगलों से बाहर निकली, तो अंबेली गांव में पहले से पुलिस द्वारा वाहन की व्यवस्था की गई थी. वहां से सभी को सुरक्षित रूप से जगदलपुर मुख्यालय ले जाया गया. जहां पुलिस की ओर से औपचारिक रूप से सभी माओवादियों का आत्मसमर्पण मीडिया और अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा.
आखिरी बड़े चेहरे का बदलता मन
पापाराव को छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों का एक बड़ा और प्रभावशाली नाम माना जाता था. उन्होंने बताया कि पिछले 10 दिनों के दौरान उनके विचारों में बदलाव आया. पहले वे संघर्ष जारी रखने के पक्ष में थे, लेकिन लगातार बदलते हालात और दबाव के बीच उन्होंने महसूस किया कि सशस्त्र आंदोलन अब व्यवहारिक नहीं रह गया है. इसके बाद उन्होंने अपने साथियों के साथ चर्चा कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया.
अब संवैधानिक तरीके से संघर्ष की बात
मुख्यधारा में लौटने के बाद पापाराव ने स्पष्ट किया है कि वे अब संविधान और कानून के दायरे में रहकर जनता के लिए काम करना चाहते हैं. उनका कहना है कि वे अपने मुद्दों और संघर्ष को अब लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाएंगे.
छत्तीसगढ़ में माओवाद के अंत की ओर संकेत
इस घटनाक्रम पर राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पापाराव जैसे बड़े नेता का आत्मसमर्पण माओवाद के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य में अब बड़े स्तर के माओवादी लगभग समाप्त हो चुके हैं और बचे हुए छोटे समूह भी जल्द मुख्यधारा में लौट सकते हैं. सरकार का मानना है कि निकट भविष्य में छत्तीसगढ़ को माओवाद मुक्त घोषित किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें- 5 लाख परिवारों के खातों में करीब 500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेगी छत्तीसगढ़ सरकार, इस योजना के तहत मिलेगा लाभ
पापा राव और उनके साथियों का आत्मसमर्पण केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है. यह दिखाता है कि संवाद, पुनर्वास और सख्त कार्रवाई के संयोजन से लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान संभव है. अब नजर इस बात पर होगी कि मुख्यधारा में लौटे ये लोग किस तरह समाज में अपनी नई भूमिका निभाते हैं और राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने में योगदान देते हैं.
यह भी पढ़ें- रायपुर में सेप्टिक टैंक हादसा, तीन सफाईकर्मियों की मौत पर NHRC ने लिया संज्ञान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं