- नरवर किले से लगभग 500 साल पुरानी और 3000kg की एक तोप चोरी हो गई है, जो सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
- चोरी में 30 हथियारबंद बदमाशों ने क्रेन-ट्रक लेकर किले में घुसकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाकर तोप ले गए.
- घटना के 12 दिन पहले किले के आसपास संदिग्ध गतिविधियां दिखी थीं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा में कदम नहीं उठाया.
इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं बसता, वह हमारी धरोहरों, स्मारकों और उन निशानियों में भी सांस लेता है जो बीते युग की कहानियां सुनाती हैं. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का नरवर किला भी ऐसी ही एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसने सदियों का इतिहास देखा है. लेकिन अब इसी किले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और पुरातत्व संरक्षण दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सिंधिया राजवंश की 500 साल पुरानी और ऐतिहासिक महत्व वाली लगभग 3000 किलो की एक कीमती तोप को हथियारबंद बदमाश रात के अंधेरे में किले से उठा ले गए. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बदमाश पूरी तैयारी के साथ आए थे और सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर इस वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो गए.
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इतिहास की धरोहर पर रात में डाका
जानकारी के अनुसार, 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश नरवर किले में घुस आए. किले के ओपन कचहरी परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक बहुमूल्य तोप को वे अपने साथ ले गए. बताया जा रहा है कि बदमाशों ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को धमकाया और विरोध करने पर जान से मारने की चेतावनी दी. घटना के बाद परिसर में केवल 13 तोपें बची हैं.
12 दिन पहले मिला था संकेत, नहीं चेता प्रशासन
इस वारदात का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसके पहले भी किले के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं. बताया जा रहा है कि करीब 12 दिन पहले कुछ ऐसी घटनाएं हुई थीं, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से गंभीरता से लिया जाना चाहिए था. लेकिन न तो सुरक्षा बढ़ाई गई और न ही अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई.

नरवर का किला अपने आप में पूरा इतिहास समेटे हुए है.
क्रेन और ट्रक लेकर पहुंचे थे बदमाश
जांच में सामने आया है कि बदमाश पूरी तैयारी के साथ किले पहुंचे थे. भारी-भरकम तोप को ले जाना आसान नहीं था, इसलिए वे अपने साथ क्रेन और ट्रक जैसी लोडिंग गाड़ियां भी लेकर आए थे. किले के पिछले रास्ते का इस्तेमाल कर उन्होंने अंदर प्रवेश किया और योजनाबद्ध तरीके से पूरी वारदात को अंजाम दिया.
सुरक्षाकर्मी ने बयां की बेबसी
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बालकिशन ने बताया कि अचानक बड़ी संख्या में हथियारबंद लोग वहां पहुंच गए. उनके पास आधुनिक हथियार थे, जबकि सुरक्षा कर्मचारियों के पास केवल एक लाठी थी. उन्होंने बताया कि मौके पर पर्याप्त रोशनी तक नहीं थी और टॉर्च जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं. बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी, जिसके चलते वे अपनी जान बचाने के लिए पीछे हट गए.

जहां से तोप चोरी हुई, वहां अब 14 की जगह 13 तोपें बची है.
क्यों खास है चोरी हुई ऐतिहासिक तोप?
नरवर किले से चोरी हुई यह तोप केवल धातु का एक पुराना ढांचा नहीं है, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार यह तोप 16वीं शताब्दी की है और उस दौर की उन्नत धातुकर्म तकनीक तथा युद्ध कौशल को दर्शाती है. इस पर बनी विशेष नक्काशी और ऐतिहासिक चिह्न इसे और भी दुर्लभ बनाते हैं.
करोड़ों में आंकी जाती है कीमत
ऐतिहासिक धरोहरों की वास्तविक कीमत तय नहीं की जा सकती, क्योंकि उनका महत्व धन से कहीं अधिक होता है. हालांकि एंटीक वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इस तरह की सदियों पुरानी धरोहरों की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है. यही वजह है कि पुलिस को इस मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह की संलिप्तता का संदेह है.
घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ डकैती और संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. साथ ही साइबर सेल की मदद से उन नेटवर्कों की भी जांच की जा रही है, जो ऐतिहासिक वस्तुओं की तस्करी से जुड़े हो सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं- पुलिस
करैरा के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा कि किले से तोप चोरी होने की सूचना मिली है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं, राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है. वे स्वयं नरवर किले का निरीक्षण करेंगे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर तोप की बरामदगी के प्रयास तेज करने पर जोर देंगे.
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