- वंदे मातरम् गायन को लेकर चल रहे विवाद पर भाजपा नेता सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से माफी की मांग की.
- सुमित्रो चटर्जी वंदे मातरम् के लेखक बंकिम चंद चट्टोपाध्याय के वंशज हैं, अभी भाजपा के विधायक है.
- उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् के महत्व को नहीं समझतीं जबकि मल्लिकार्जुन खरगे को इसे रोकना चाहिए था.
स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. बीजेपी के कई नेता इस मामले में सोनिया गांधी की कड़ी आलोचना कर रहे हैं. सोनिया से माफी की मांग की जा रही है. इस बीच अब वंदे मातरम् गीत को लिखने वाले बंकिम चंद चट्टोपाध्याय के वंशज और भाजपा नेता सुमित्रो चटर्जी ने भी इस मामले में सोनिया गांधी से माफी की मांग की है. चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्' का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई और इसे रोकने के बार-बार प्रयास किए गए.
सोनिया को लिखे पत्र में लिखा- यह ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव
चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना ‘‘न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है.'' नैहाटी के भाजपा विधायक सुमित्रो चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं. उन्होंने इस घटना को लेकर ‘‘गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश'' व्यक्त किया.
सोनिया गांधी तो इटली से आईं, उन्हें शायद इसका महत्व नहीं पताः सुमित्रो
मीडिया से बात करते हुए सुमित्रो चटर्जी ने कहा, "ज्यादा क्या कहना है? सोनिया गांधी तो इटली से आई हुई हैं, वो शायद वंदे मातरम् का महत्व नहीं समझती हैं. लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे तो भारत के हैं, उनको तो समझना चाहिए था. उनको तो रोकना-टोकना चाहिए था. हमे उनका रोकना बहुत बुरा लगा. हमारी फैमिली को भी बहुत बुरा है. यह केवल हमें या हमारी फैमिली को ही नहीं बल्कि पूरे भारत, पूरे बंगाली समुदाय को बुरा लगा है."
वंदे मातरम् गायन के दौरान सोनिया का फिजिकल एक्शन बेहद गंदा
सुमित्रो चटर्जी ने आगे कहा कि मैंने सोनिया गांधी को मेल किया है. क्योंकि वो सोनिया गांधी का इतिहास नहीं जानती. उसका एक कॉपी मल्लिकार्जुन खरगे को दिया है. मैंने मेल में वंदे मातरम् के महत्व के बारे में लिखा है. सोनिया गांधी का फिजिकल एक्शन बर्दाश्त के लायक था. विरोध-प्रदर्शन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हां हम विरोध करेंगे. लेकिन अभी हम मुख्यमंत्री के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं. हमारी पार्टी एक अनुशासन में चलती है. पार्टी जो फैसला लेगी, वहीं करेंगे.
सुमित्रो चटर्जी ने वंदे मातरम् का इतिहास भी बताया
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था, बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी विद्यार्थियों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था.
सुमित्रो चटर्जी, बीजेपी विधायक, नैहाटी और ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रत्यक्ष वंशज, ने स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्' के कथित अपमान को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखकर गहरा रोष व्यक्त किया है।
— PB-SHABD (@PBSHABD) August 16, 2026
उन्होंने भारत के नागरिकों, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की… pic.twitter.com/5TbUXgiUHd
सुमित्रो बोले- जिन्ना की आपत्ति पर 1937 में झुक गई थी कांग्रेस
चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘‘कथित दोहरी नीति'' नयी नहीं है. चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे ‘‘झुक गई'' थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते'' की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है.
वंदे मातरम् किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहींः सुमित्रो
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई ‘छात्र परिषद' जब ‘‘मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम्'' नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है. उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्' किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के रक्त एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है.
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