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केन-बेतवा परियोजना: पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को हटाया, कई को गिरफ्तार करने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया.

केन-बेतवा परियोजना: पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को हटाया, कई को गिरफ्तार करने का आरोप
केन बेतवा लिंक परियोजना के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटाया
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मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में बैठे ग्रामीणों को पुलिस ने रविवार सुबह हटा दिया. प्रदर्शनकारी पिछले 15 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे. इस दौरान पर मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा था. साथ ही पुलिस ने चिता आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर व आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने का आरोप है. केन-बेतवा आंदोलनकारियों को जबरन हटाए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

अमित भटनागर की गिरफ्तार के प्रदर्शनकारियों के आरोप का पुलिस ने इनकार किया है. साथ ही बताया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से सभी को 'प्रेम से व शांतिपूर्वक' उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है.

मौके पर मौजूद पुलिस बल

मौके पर मौजूद पुलिस बल

खराब मौसम की वजह से हटाया

कलेक्टर पार्थ जयसवाल ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और मौसम खराब हो गया है. आंदोलनकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें हटाया गया है. स्वास्थ्य संबंधी समस्या से परेशान लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया है.

3 जुलाई से इस वजह से शुरू किया था प्रदर्शन

केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांव, रूंज, नैगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले प्रदर्शन 3 जुलाई से चल रहा था. परियोजना से प्रभावितों को न्याय दिलाने और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर अनशन कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे आमरण अनशन पर बैठे हुए थे.

अमित भटनागर का आरोप था कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और यह भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से जुड़े कानूनों की भावना के विपरीत है. उन्होंने खरियानी गांव के स्कूल भवन को हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया और बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने की बात कही.

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ACP ने क्या कहा

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने बताया ग्रामीण जिस जगह पर आंदोलन कर रहे थे, वहां पुल निर्माण का काम हो रहा है और बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ रहा था, जो कि कभी भी खतरा बन सकता था. उन्होंने कहा कि लोग काफी दिनों से भूख हड़ताल पर थे, इसलिए उनका स्वास्थ्य भी गिर रहा था और कुछ की तबियत भी बिगड़ रही थी.

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पटले ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की टीम चिकित्सकों के साथ यहां आई थी और सभी से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की गई. उन्होंने कहा कि बढ़ते पानी की वजह से यह जगह भी सुरक्षित नहीं थी, इसलिए प्रेम और शांतिपूर्ण तरीके से उन्हें हटाया गया और सुरक्षित भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि अमित भटनागर भी भूख हड़ताल पर थे और उनका स्वास्थ लगातार गिर रहा था इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है.

भटनागर करने वाले थे 400 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा?

आंदोलनकारियों में शामिल उनकी एक अन्य प्रमुख नेता दिव्या अहिरवार ने कहा कि हमारा आंदोलन 3 जुलाई से लगातार अभी तक जारी है और भटनागर का आमरण अनशन भी जारी है. उन्होंने कहा कि भटनागर आज केन-बेतवा में 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का मीडिया के समक्ष खुलासा करने वाले थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुबह 5 बजे ही हजारों की संख्या में भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को आंदोलन स्थल से गिरफ्तार कर लिया.

आंदोलनकारियों ने दी चेतावनी

उन्होंने कहा चेतावनी देते हुए कहा कि अमित भटनागर को कुछ भी होता है और हमारे आंदोलनकारियों में से एक भी व्यक्ति को खरोंच भी आती है तो उसका जिम्मेदार प्रशासन होगा, स्वयं मुख्यमंत्री होंगे. मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की भागीदारी वाले इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप ‘जल सत्याग्रह', ‘चिता सत्याग्रह' और प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह' भी किया.

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित कर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है.

हालांकि, परियोजना से प्रभावित कुछ परिवारों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने विस्थापन, पुनर्वास तथा पन्ना बाघ अभयारण्य के हिस्सों सहित जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर इसका विरोध किया है.

वर्तमान आंदोलन में रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं. उनका कहना है कि पुनर्वास को लेकर प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है.

प्रशासन ने और क्या बताया

छतरपुर जिला प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल 176 लोग पड़ोसी पन्ना जिले की रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित हैं. उनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजा प्रक्रिया से संबंध नहीं है. प्रशासन ने एक बयान में प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटकर वहां के जिला प्रशासन से पुनर्वास का लाभ लेने का आग्रह किया.

प्रशासन का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया है.

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने साधा निशाना

केन-बेतवा आंदोलनकारियों को जबरन हटाए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपना शासन मॉडल बना लिया है. डरती है सरकार उन प्रदर्शनकारियों से जो सरकार से नहीं डरते. कल जंतर-मंतर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक और उनके साथियों को जबरन हटाया गया और आज केन-बेतवा लिंक परियोजना में भ्रष्टाचार, कानून के उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे अमित भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को पुलिस बल के साथ गिरफ्तार कर लिया.

उन्होंने आगे लिखा, "मैं 14 जुलाई को स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचा था. वहां आंदोलनकारियों की पीड़ा सुनी थी और उनकी लोकतांत्रिक लड़ाई के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया था, लेकिन सरकार ने संवाद का रास्ता चुनने के बजाय दमन का रास्ता चुना. क्या अब इस देश में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना भी जुर्म हो गया है?क्या आदिवासियों, किसानों और प्रभावित परिवारों की आवाज़ का जवाब पुलिस की गिरफ्तारी होगी?"

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