केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के हक के लिए लड़ाई लड़ रहे अमित भटनागर ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है.उन्होंने कहा है कि यदि उनके साथ कोई जोर-जबरदस्ती या कड़ा कदम उठाया गया, तो वे पानी पीना भी छोड़ देंगे.दरअसल, बराना नदी के बीच 16 दिनों से चल रहे उनके 'सांकेतिक चिता आंदोलन' को रविवार तड़के प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ समाप्त करा दिया. भूख हड़ताल के कारण तबीयत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बिजावर अस्पताल भेजा, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. अमित का दावा है कि उनकी भूख हड़ताल अब भी जारी है. उधर कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने भी ट्वीट करके कहा है कि सरकार ने संवाद का रास्ता चुनने के बजाय दमन का रास्ता चुना है.
“मैं न तो ड्रिप लगवाऊँगा और न ही कुछ खाऊँगा। मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा। अगर मुझे जबरन कुछ खिलाने या ड्रिप लगाने की कोशिश की गई, तो मैं पानी पीना भी छोड़ दूँगा।” - अमित भटनागर #KenBetwa #KenBetwaLinkProject #Chhatarpur #TribalRights pic.twitter.com/iFxuA8BagF
— Amit Bhatnagar (@iAmitBhatnagar) July 20, 2026
16 दिनों से अनशन, बेटे की अपील भी ठुकराई
अमित भटनागर पिछले 16 दिनों से बराना नदी के पानी के बीचों-बीच सांकेतिक चिता बनाकर अन्न-जल त्यागकर अनशन पर अड़े हुए थे. आंदोलन को समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. अधिकारियों ने उनके परिजनों और यहां तक कि उनके छोटे बेटे के माध्यम से भी आंदोलन खत्म कराने का प्रयास किया, लेकिन भटनागर ने साफ कर दिया कि जब तक विस्थापित आदिवासियों को न्याय और उचित पुनर्वास नहीं मिलता, उनका संघर्ष थमेगा नहीं. अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के सहारे संदेश जारी कर बताया है कि उनका अनशन जारी है. प्रशासन की ओर से जबरदस्ती की गई तो वो पानी पीना भी छोड़ देंगे.
लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपना शासन मॉडल बना लिया है। डरती है सरकार उन प्रदर्शनकारियों से जो सरकार से नहीं डरते।
— Umang Singhar (@UmangSinghar) July 19, 2026
कल जंतर-मंतर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक जी और उनके साथियों को जबरन हटाया गया, और आज… pic.twitter.com/VmjSIszCHE
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B.Ed. कॉलेज के संचालन से अन्ना आंदोलन और राजनीति तक का सफर
अमित भटनागर का जीवन और सामाजिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.समाज सेवा और सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले वे अपने परिवार के B.Ed. कॉलेज का संचालन करते थे. साल 2011 में जब देश में अन्ना हजारे का ऐतिहासिक 'भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन' शुरू हुआ, तो भटनागर उससे जुड़े और यहीं से उन्होंने जनसेवा की राह चुनी. इसके बाद वे आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हुए और मध्य प्रदेश के बिजावर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा. छतरपुर और बिजावर इलाके में उन्हें आम लोगों के बीच सादगीपूर्ण जीवन शैली और स्थानीय आदिवासियों-किसानों की लड़ाई लड़ते हुए देखा जाता है.
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44 हजार करोड़ की परियोजना और विस्थापन का संकट
बता दें कि करीब 44,000 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2024 को खजुराहो में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर किया था. सरकार का तर्क है कि इस विशाल प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों को पानी और सिंचाई की बड़ी सुविधा मिलेगी.वहीं दूसरी ओर, आंदोलनकारियों और स्थानीय ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इस परियोजना की वजह से करीब 44 हजार करोड़ के बजट वाले इस जाल में हजारों गरीब और आदिवासी परिवार बेघर हो जाएंगे. विस्थापित होने वाले परिवारों को न तो उचित मुआवजा दिया जा रहा है और न ही उनके पुनर्वास व रोजगार की कोई पुख्ता गारंटी दी गई है. फिलहाल प्रशासन द्वारा आंदोलन समाप्त कराए जाने के बाद पूरे इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
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