Ken Betwa Link Project Controversy: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में केन‑बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ परियोजना से हो रहे विस्थापन को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है. जमीन, जंगल और जल बचाने की मांग को लेकर सैकड़ों आदिवासी किसान पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. इस आंदोलन को कांग्रेस का खुला समर्थन मिल रहा है. झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया खुद मौके पर पहुंचकर आदिवासियों के साथ जमीन पर बैठ गए और पुलिस‑प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. देर रात हुई गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश है, जिससे पूरे इलाके में तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है. पन्ना से NDTV के लिए विवेक सोनी की रिपोर्ट.
एसपी ऑफिस के बाहर डटे सैकड़ों ग्रामीण
केन‑बेतवा और रुंझ परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी परिवार अपनी मांगों को लेकर पन्ना एसपी कार्यालय के बाहर डेरा डाले हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन छीनी जा रही है, लेकिन बदले में न तो उचित मुआवजा मिल रहा है और न ही पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जा रही है.

Ken Betwa Link Project Controversy: विरोध प्रदर्शन की तस्वीर
मप्र में अगर पुलिस बेलगाम होगी तो कांग्रेस सड़को पर संग्राम लेकर आएगी।
— Dr.Vikrant Bhuria (@VikrantBhuria) May 8, 2026
आज पन्ना पहुँचा तो पता चला केन बेतवा परियोजना में आदिवासियों के न्याय की लड़ाई लड़ रहे अमित भटनागर को पुलिस ने बिना किसी कारण के बेबुनियाद धराए लगाकर उठा लिया गया।
हम जानना चाहते पुलिस अपराधियों को दंड देने… pic.twitter.com/2rqVdjfL5V
देर रात गिरफ्तारी से भड़का गुस्सा
प्रदर्शनकारियों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया जब सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और कई ग्रामीणों को देर रात गिरफ्तार किया गया. आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बिना महिला पुलिस बल के आधी रात को घरों में दबिश दी और महिलाओं के साथ बदसलूकी की.
विधायक विक्रांत भूरिया ने खोला मोर्चा
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने धरने पर बैठकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है. उनके अनुसार परियोजनाओं के चलते करीब 25 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं और लगभग 7 हजार परिवार बेघर हो रहे हैं.

Ken Betwa Link Project Controversy: क्यों है विवाद?
“जमीन नहीं तो किसान कैसे”
विधायक भूरिया ने कहा कि जब तक पुलिस अधीक्षक स्वयं आकर जवाब नहीं देतीं, धरना नहीं उठेगा. उन्होंने सवाल उठाया कि जमीन के बिना किसान कैसे जिएगा और बिना जंगल आदिवासियों का अस्तित्व कैसे बचेगा.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों की मांग है कि गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और अन्य ग्रामीणों को तत्काल रिहा किया जाए, विस्थापित परिवारों को ‘जमीन के बदले जमीन' और उचित मुआवजा दिया जाए तथा रात में दबिश और बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन लेकिन तनावपूर्ण माहौल
धरने के दौरान एसपी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है. आदिवासी पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नारों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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