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क्या मोहन यादव कैबिनेट में फेरबदल की शुरुआत हो गई? पशुपालन मंत्री लखन पटेल से वापस लिया गया विभाग

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लिए जाने के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं. राज्य मंत्री के विभाग वापस लेने के इस निर्णय को भाजपा संगठन द्वारा की गई मंत्रियों की समीक्षा प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है.

क्या मोहन यादव कैबिनेट में फेरबदल की शुरुआत हो गई? पशुपालन मंत्री लखन पटेल से वापस लिया गया विभाग

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने ने सियासी हलचल तेज कर दी है. यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में NDTV को दिए एक विशेष इंटरव्यू में खुलासा किया था कि सरकार और संगठन ने प्रत्येक मंत्री के राजनीतिक प्रभाव, कार्यक्षेत्र और विभागीय प्रदर्शन की समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है.लखन पटेल से विभाग वापस लिए जाने को फिलहाल एक प्रशासनिक निर्णय बताया जा सकता है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह मंत्री-वार समीक्षा के बाद उठाया गया पहला कदम है? क्या मोहन मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है? और क्या आने वाले दिनों में कुछ अन्य मंत्रियों के विभाग या जिम्मेदारियां भी बदली जा सकती हैं?

ये महज संयोग तो नहीं हो सकता न !

सूत्र बताते हैं कि कल देर रात ये फैसला हुआ और फौरन गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया. इस फैसले पर पूछे जाने पर मंत्री लखन पटेल ने सिर्फ इतना कहकर फोन काट दिया कि ये मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है फिर चाहे फैसला रात में हो या दिन में.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 7 जुलाई को NDTV से बातचीत में स्पष्ट रूप से कहा था कि मुख्यमंत्री अपने स्तर पर मंत्रियों की समीक्षा करते हैं. इसके अलावा संगठन और मुख्यमंत्री ने मिलकर भी प्रत्येक मंत्री से बातचीत की है. खंडेलवाल ने कहा था, “कुछ दिन पहले संगठन और मुख्यमंत्री ने मिलकर हर मंत्री से बातचीत की. उनके प्रभाव क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र और विभागों में उनकी परफॉर्मेंस को लेकर चर्चा हुई.

हमने पूरी समीक्षा करके केंद्रीय नेतृत्व को दे दी है.” इस बयान के कुछ ही दिन बाद लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने के फैसले को अब उसी समीक्षा प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि सरकार या भाजपा ने दोनों घटनाक्रमों के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे महज संयोग मानने को कोई तैयार नहीं है.

खंडेलवाल ने पहले ही इशारा कर दिया था

हेमंत खंडेलवाल ने NDTV के सवालों का जवाब देते हुए संभावित बदलावों से इनकार भी नहीं किया था. उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में जो बदलाव होने हैं, वे होंगे, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है.उन्होंने यह भी जोड़ा था कि जब केंद्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा, तभी परिवर्तन होंगे.इस बयान का राजनीतिक अर्थ साफ है मंत्रियों की समीक्षा पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट दिल्ली पहुंच चुकी है और अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है

ऐसे में लखन पटेल के विभाग में हुआ बदलाव मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल से पहले की प्रशासनिक कवायद है या एक अलग फैसला, इस पर बहस शुरू हो गई है.NDTV इंटरव्यू में जब हेमंत खंडेलवाल से पूछा गया कि क्या उनकी नजर में कोई मंत्री अंडरपरफॉर्म कर रहा है, तो उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जवाब में यह जरूर स्पष्ट कर दिया कि संगठन के पास मंत्रियों के कामकाज का व्यापक फीडबैक मौजूद है.

खंडेलवाल ने कहा था, “जो अंडरपरफॉर्म कर रहा है, उसका फीडबैक हमें कार्यकर्ताओं से भी आता है, मीडिया से भी आता है और आम जनता से भी आता है. ऐसे में आपको भी पता लग जाता है कि किस मंत्री का परफॉर्मेंस अच्छा है और किसका नहीं मुझे अलग से बताने की जरूरत नहीं है.”
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क्या यह निर्णय भी उसी फीडबैक का परिणाम है?

उनका यह बयान बताता है कि मंत्रियों की समीक्षा केवल विभागीय फाइलों या सरकारी प्रस्तुतियों के आधार पर नहीं हुई है. इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं, मीडिया और जनता से मिले फीडबैक को भी शामिल किया गया है. अब लखन पटेल से एक प्रमुख विभाग वापस लिए जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या यह निर्णय भी उसी फीडबैक का परिणाम है.लखन पटेल पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में काम कर रहे थे. यह विभाग मोहन सरकार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, दुग्ध उत्पादन, गौ-संरक्षण, गौशालाओं और निराश्रित मवेशियों से जुड़ी योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है.

फिलहाल CM के पास रहेगा विभाग

सरकार मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आगे ले जाने, डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार करने और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य घोषित कर चुकी है. ऐसे महत्वपूर्ण समय में विभागीय जिम्मेदारी में बदलाव को सामान्य घटनाक्रम मानना आसान नहीं है. लखन पटेल ने विधानसभा में दावा किया था कि अगले दो वर्षों में प्रदेश की सड़कों को निराश्रित मवेशियों से मुक्त कर दिया जाएगा. उन्होंने स्वावलंबी गौशालाओं के निर्माण, प्रति गौवंश सहायता राशि बढ़ाने और बड़े गौ-आवास विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया था. इसके बावजूद निराश्रित मवेशियों, सड़क दुर्घटनाओं और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा सरकार के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है.सरकार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि लखन पटेल से विभाग वापस लेने की वास्तविक वजह क्या है? यह प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था है, कामकाज को लेकर असंतोष है या फिर मंत्रिमंडल के प्रस्तावित पुनर्गठन की भूमिका इन सवालों का आधिकारिक जवाब आना बाकी है.फिलहाल ये विभाग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने पास रखा है. 
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