Ujjain Land Scam News: मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक अजीब सा विरोधाभास देखने को मिल रहा है. कांग्रेस के जिस दिग्गज नेता और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भाजपा सालों से अपना सबसे बड़ा राजनीतिक निशाना बनाती रही है, आज उसी की सत्ताधारी दल के नेता तारीफों के पुल बांध रहे हैं. लेकिन यह तारीफ दिग्विजय सिंह के लिए अपनी ही पार्टी के भीतर एक नई मुसीबत लेकर आई है. अपनों के ही तीखे तीरों का सामना कर रहे दिग्विजय सिंह अब कांग्रेस के भीतर ही घिरते नजर आ रहे हैं.
बात सिर्फ तारीफ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने तो खुलेआम दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का न्योता तक दे डाला है. लोधी ने दिग्विजय सिंह को एक "भला और बुजुर्ग इंसान" बताते हुए कहा कि दशकों की सेवा के बाद भी कांग्रेस उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रही है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं, तो उन्हें "राजशाही सम्मान" दिया जाएगा. इस पर कांग्रेस ने भी तुरंत मोर्चा संभाला. कांग्रेस नेता रवि सक्सेना ने पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह का "डीएनए पूरी तरह कांग्रेस से जुड़ा है." उन्हें पार्टी का एक वफादार सिपाही बताते हुए सक्सेना ने कहा कि वह ऐसे नेता हैं, जिनसे भाजपा हमेशा "थरथर कांपती" है. उन्होंने भाजपा को नसीहत दी कि वह दिग्विजय सिंह के पाला बदलने के सपने देखना बंद करें.
उज्जैन जमीन विवाद से शुरू हुआ 'गृहयुद्ध'
इस पूरे सियासी तूफान के केंद्र में है उज्जैन का 'वीर भारत न्यास' भूमि विवाद. बीते 24 जून को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़ी करीब 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन एक निजी ट्रस्ट 'वीर भारत न्यास' को महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर दे दी गई, लेकिन खेल तब पलट गया, जब इसके ठीक दो दिन बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में पत्रकारों से बात करते हुए अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष के दावों को खारिज कर दिया. दिग्विजय सिंह ने कहा था कि यह आरोप लगाया जा रहा है कि 500 करोड़ रुपये की जमीन 1 रुपये में किसी निजी न्यास को दे दी गई. लेकिन मेरे पास सारे कागजात हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि सरकारी ट्रस्ट को दी गई है, जिसके पदेन अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने आगे यह भी जोड़ दिया था कि वह बिना पूरी रिसर्च के कोई बात नहीं करते और साथ ही 'दलालों' का जिक्र भी कर दिया, जिसने कांग्रेस के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया.
दिग्विजय की बयानबाजी से पार्टी के नेता हुए असहज
दिग्विजय सिंह का यह बयान कांग्रेस के भीतर एक राजनीतिक ग्रेनेड की तरह फटा. जहां एक तरफ जीतू पटवारी अपने आरोपों पर अड़े रहे. वहीं, पार्टी के भीतर सुगबुगाहट तेज हो गई कि दिग्विजय ने सरेआम प्रदेश अध्यक्ष को आइना दिखा दिया है. इसके बाद भोपाल में मंगलवार को हुई कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में विधायक आरिफ मसूद और पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि अगर कोई मतभेद था, तो उसे पार्टी के अंदरूनी मंच पर उठाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक रूप से. सबसे तीखा हमला पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी और कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी की तरफ से आया. उन्होंने सोशल मीडिया पर सीधे सवाल दाग दिया कि दिग्विजय सिंह के 'नागपाश' से कांग्रेस कब मुक्त होगी?
भाजपा के लिए 'पके पकाए आम' जैसा मौका
भाजपा के लिए कांग्रेस का यह अंदरूनी टकराव किसी बड़े सियासी तोहफे से कम नहीं था. प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने एक्स पर लिखा कि "झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती" और जीतू पटवारी के अभियान को खुद दिग्विजय सिंह ने ही पंचर कर दिया है. वहीं, कभी दिग्विजय सिंह पर सबसे तीखे हमले करने वाले भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा भी उनके मुरीद नजर आए. बाजपेयी ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने बिना जांच परख के आरोप लगाने वाले कांग्रेसी नेताओं को "आईना दिखा दिया है." इसके अलावा रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सिंह ने पटवारी के दावों के खोखलेपन को उजागर कर कांग्रेस को उसके अपने अंतर्विरोधों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है.
डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुटे दिग्विजय
विवाद को बढ़ता देख मंगलवार शाम को जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह एक साथ मीडिया के सामने आए. दोनों ने संयुक्त बयान जारी कर एकजुटता दिखाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेगी और जमीन सौदों की जांच अपने स्तर पर कर रही है.
"जीतू पटवारी मेरे बेटे जैसे हैं"
इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने अपने 'दलाल' वाले बयान पर भी सफाई दी, जिससे पार्टी में भारी नाराजगी थी. उन्होंने कहा कि मेरे और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच मतभेदों का भ्रम फैलाया जा रहा है. वह मेरे बेटे जैसे हैं. मैंने कांग्रेस में आधी सदी से ज्यादा का वक्त बिताया है. मैं अपनी ही पार्टी के किसी नेता या प्रदेश अध्यक्ष के लिए 'दलाल' जैसे शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं कर सकता."
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भले ही दोनों नेताओं ने कैमरे के सामने हाथ मिला लिए हों, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर की खींचतान इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है, और भाजपा इस मौके का पूरा फायदा उठाने के मूड में है.
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