एमपी के बड़वानी जिले के राजपुर में एक ही गोत्र में हुई शादी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है. कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार, जुर्माना और शादी में शामिल लोगों को दंडित करने जैसे फैसलों के आरोपों के बीच राजपुर पुलिस ने कुशवाह समाज के संगठन से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. यह कार्रवाई पीड़ित युवक हर्ष लोनारे की शिकायत पर की गई. इससे पहले मामले में हाईकोर्ट भी संज्ञान ले चुका है और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया.
प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ विवाद
मामला राजपुर का है, जहां एक युवक और युवती ने परिवार की सहमति से विवाह किया था. दोनों एक ही गोत्र से थे, इसलिए विवाह से पहले समाज में इस विषय पर चर्चा भी हुई थी. परिजनों के अनुसार युवती के मामा ने उसे विधिवत गोद लिया था और सभी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराया. कन्यादान की रस्म भी पूरी विधि-विधान के साथ निभाई.
पहले धर्मशाला मिली, फिर बदले हालात
परिवार का कहना है कि शुरुआत में विवाह राजपुर स्थित कुशवाह समाज की धर्मशाला में आयोजित होना था. इसके लिए समाज की ओर से धर्मशाला भी उपलब्ध करा दी गई. हालांकि बाद में कुछ कारणों से विवाह की तारीख आगे बढ़ गई और कार्यक्रम बड़वानी में आयोजित किया. इसके बाद समाज के भीतर बैठकों का दौर शुरू हुआ और यहीं से विवाद बढ़ता चला गया.
शादी में शामिल होने पर दंड का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि समाज की बैठकों में यह निर्णय लिया गया कि जो भी व्यक्ति इस विवाह में शामिल होगा, उससे 2100 रुपये का दंड वसूला जाएगा. इसके बावजूद समाज के करीब एक हजार लोग और बड़ी संख्या में रिश्तेदार विवाह समारोह में शामिल हुए. परिवार का दावा है कि इसके बाद समाज की ओर से कई कड़े फैसले लिए.
बहिष्कार और जुर्माने का दावा
परिजनों के मुताबिक पहले दोनों परिवारों को 11 साल के लिए समाज से निष्कासित करने का फैसला लिया. बाद में इस अवधि को बढ़ाकर आजीवन कर दिया. इतना ही नहीं, दोनों परिवारों पर 51-51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. परिवार का आरोप है कि विवाह में शामिल अन्य लोगों से भी दंड राशि जमा कराने के निर्देश दिए और तय समय में राशि जमा न करने पर सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दी.
प्रशासन से लेकर अदालत तक लगाई गुहार
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने समाज के जिम्मेदार लोगों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी बात रखी, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा.
बालिग होने और सहमति से विवाह का तर्क
युवक और युवती का कहना है कि वे दोनों बालिग हैं और दोनों परिवारों की सहमति से विवाह किया है. उनका कहना है कि जब विवाह कानूनी रूप से वैध है तो उसके बाद सामाजिक दबाव बनाना, बहिष्कार करना या किसी प्रकार का दंड तय करना उचित नहीं है. पीड़ित पक्ष का तर्क है कि देश के कानून से ऊपर कोई सामाजिक व्यवस्था नहीं हो सकती.
समाज का पक्ष भी सामने आया
इस पूरे मामले में कुशवाह समाज के जिला अध्यक्ष रमेशचंद कुशवाह पहले ही आरोपों को खारिज कर चुके हैं. उनका कहना है कि उन्हें न्यायालय की ओर से किसी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है. यदि नोटिस मिलेगा तो वे अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे. उन्होंने लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है.
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