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सावधान! MP में 10वीं और 12वीं बोर्ड पेपर के नाम पर फ्रॉड; साइबर ठग बैंक खाली करने के लिए ऐसे बिछा रहे हैं जाल

MP Board Exam Paper Fraud: साइबर पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ पेपर बेचने की ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल अरेस्ट और मोबाइल कंट्रोल जैसी तकनीकों से जुड़ा बड़ा साइबर अपराध है.

सावधान! MP में 10वीं और 12वीं बोर्ड पेपर के नाम पर फ्रॉड; साइबर ठग बैंक खाली करने के लिए ऐसे बिछा रहे हैं जाल
MP Board Exam 2026: सावधान! MP में 10वीं और 12वीं बोर्ड पेपर के नाम पर फ्रॉड; साइबर ठग बैंक खाली करने के लिए ऐसे बिछा रहे हैं जाल

MP Board Exam Fraud: मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षाएं (Board Exams) नजदीक आते ही साइबर ठगों (Cyber Thug) ने नए तरीके अपनाते हुए छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. ग्वालियर साइबर क्राइम विंग और शिक्षा विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि ठग सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर 10वीं‑12वीं के पेपर लीक का लालच देकर लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. इसके लिए वे “pepar.apk” नाम की संदिग्ध फाइल भेज रहे हैं, जिसे डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो जाता है और ठग बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं.

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि टेलीग्राम पर ‘MP Board Exam Support', ‘10‑12वीं पेपर' जैसे कई फर्जी ग्रुप बनाए गए हैं जिनमें कथित प्रश्नपत्र वायरल किए जा रहे हैं. छात्रों को भरोसा दिलाने के लिए पेपर होने का दावा किया जाता है, जबकि यह पूरी तरह साइबर फ्रॉड है.

साइबर पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ पेपर बेचने की ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल अरेस्ट और मोबाइल कंट्रोल जैसी तकनीकों से जुड़ा बड़ा साइबर अपराध है.

इस पूरे मामले पर ग्वालियर साइबर क्राइम विंग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर मिलने वाले किसी भी पेपर को असली न मानें, क्योंकि बोर्ड की ओर से कभी भी पेपर डिजिटल रूप में साझा नहीं किए जाते. किसी भी संदिग्ध फाइल, लिंक या APK को तुरंत डिलीट कर दें.

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऐसी फाइल इंस्टॉल करते ही मोबाइल का पूरा डेटा ठगों के नियंत्रण में चला जाता है, जिससे वे :

  • UPI भुगतान ऐप खोल सकते हैं
  • बैंक अकाउंट तक पहुंच सकते हैं
  • निजी फोटो‑वीडियो चुरा सकते हैं
  • इसके अलावा पैसे की मांग कर ब्लैकमेल भी कर सकते हैं#

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें. साथ ही, अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को मोबाइल पर अनजान लिंक न खोलने और संदिग्ध नंबरों पर जवाब न देने के लिए जागरूक करें.

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