MP BJP Working Committee: भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भले ही कार्यसमिति की पहली बैठक के लिए स्थान तय हो चुका है, लेकिन अब तक नई समिति का औपचारिक ऐलान नहीं हो पाया है. तय कार्यक्रम के मुताबिक, कार्यसमिति के गठन के बाद इसकी पहली बैठक ओरछा में राम राजा सरकार के दरबार में आयोजित होगी. हालांकि इससे पहले संगठन के भीतर नामों को लेकर जबरदस्त मंथन और माथापच्ची जारी है. इस बार पार्टी नेतृत्व प्रदेश कार्यसमिति का आकार छोटा रखने की तैयारी में है, जिससे नए और पुराने नेताओं, क्षेत्रीय समीकरण और सामाजिक संतुलन को साधना नेतृत्व के लिए आसान नहीं रह गया है.
नई कार्यसमिति को लेकर संगठन में हलचल
प्रदेश बीजेपी में नई कार्यसमिति के गठन को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत कार्यसमिति को सीमित रखने के पक्ष में हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस बार प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की संख्या अधिकतम 106 तक रखने की योजना है. इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल का अधिकतम 30 प्रतिशत, यानी लगभग 32 तक सीमित रखने पर सहमति बनाने की कोशिश चल रही है.

MP BJP Working Committee: मध्य प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति
पिछली कार्यसमिति का बढ़ता आकार
बीते कुछ वर्षों में प्रदेश बीजेपी की कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया. खास तौर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के कार्यकाल के दौरान कार्यसमिति, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या मिलकर 463 तक पहुंच गई थी.
वर्तमान कार्यसमिति की स्थिति इस प्रकार रही :
- प्रदेश कार्यसमिति सदस्य: 187
- स्थायी आमंत्रित सदस्य: 52
- विशेष आमंत्रित सदस्य: 224
- कुल सदस्य: 463
अब पार्टी नेतृत्व इस बड़े आकार को बोझ मानते हुए नई टीम को ज्यादा चुस्त-दुरुस्त और सीमित स्वरूप देना चाहता है.

MP BJP Working Committee: अभी ऐसे हैं आंकड़े
62 संगठनात्मक जिले, लेकिन सीटें कम
प्रदेश में बीजेपी के कुल 62 संगठनात्मक जिले हैं. लेकिन जब प्रदेश कार्यसमिति की कुल संख्या 106 सदस्यों तक सीमित होगी, तो हर जिले को प्रतिनिधित्व देना एक बड़ी चुनौती बन गया है. यही वजह है कि संगठन के भीतर यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि किस जिले, किस नेता और किस सामाजिक वर्ग को प्राथमिकता दी जाए.
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर जोर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार कार्यसमिति में क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ जातीय समीकरण और महिलाओं की भागीदारी पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है. संगठन चाहता है कि सभी संभागों और प्रमुख सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन सीमित संख्या के कारण कई दावेदारों को फिलहाल इंतजार की सूची में रहना पड़ सकता है.
छोटी कार्यसमिति, लंबी दावेदारों की सूची
कार्यसमिति का आकार भले छोटा किया जा रहा हो, लेकिन दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इससे संगठन के भीतर बेचैनी साफ देखी जा सकती है. पार्टी हर नाम को संगठनात्मक योगदान, क्षेत्र, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक संतुलन के पैमाने पर परख रही है. ऐसे में नई टीम बनाना केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं रह गया, बल्कि यह पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है.
विपक्ष ने साधा निशाना
बीजेपी की इस कवायद पर विपक्ष ने भी हमला बोलना शुरू कर दिया है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है. कांग्रेस प्रवक्ता अवनीश बुंदेला ने दावा किया कि बीजेपी शिवराज गुट, नाराज गुट, महाराज गुट और मोहन यादव गुट में बंटी हुई है. उनका कहना है कि सिर्फ कार्यसमिति ही नहीं, संगठन के हर स्तर पर आपसी खींचतान की स्थिति है.
बीजेपी का जवाब: जल्द होगा ऐलान
इन आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है. पार्टी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि बीजेपी एक कैडर आधारित पार्टी है और जिले स्तर तक समितियों का गठन पूरा हो चुका है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान भी जल्द कर दिया जाएगा. साथ ही महिलाओं को भी नई टीम में उचित स्थान दिया जाएगा. पार्टी का कहना है कि सही समय पर संतुलित और मजबूत कार्यसमिति सामने आएगी.
ओरछा में पहली बैठक की तैयारी
जैसे ही नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा होगी, इसकी पहली बैठक ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी ओरछा में राम राजा सरकार के दरबार में आयोजित की जाएगी. इस बैठक को संगठनात्मक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए पार्टी प्रदेश स्तर पर एकजुटता और अनुशासन का संदेश देना चाहती है.
सबकी निगाहें नई सूची पर
फिलहाल प्रदेश बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें सिर्फ एक सवाल पर टिकी हैं, नई कार्यसमिति में किसे जगह मिलेगी और कौन बाहर रह जाएगा. छोटे आकार की कार्यसमिति में शामिल होना नेतृत्व के विश्वास की मुहर के तौर पर देखा जा रहा है.
संतुलन साधने की बड़ी चुनौती
बीजेपी के सामने इस बार चुनौती सिर्फ कार्यसमिति बनाने की नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन साधने की है. क्षेत्रीय समीकरण, जातीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और पुराने-नए चेहरों के बीच तालमेल—इन सभी को साधते हुए सूची तैयार करना आसान नहीं है. साफ है कि ओरछा में होने वाली पहली बैठक से पहले भोपाल में संगठनात्मक गणित पर मंथन जारी है. अब देखना है कि नई कार्यसमिति कितनी संतुलित और प्रभावी साबित होती है.
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