- मध्य प्रदेश विधानसभा में आज पेश किए गए 14 बिल.
- इन बिलों पर सदन में आगे की जाएगी चर्चा, विपक्ष ने किया जोरदार हंगामा.
- यूसीसी बिल को भी पेश किया, खबर में नीचे जानें शादी-लिव-इन में क्या होंगे नियम.
Madhya Pradesh Vidhan Sabha: मध्य प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र (MP Monsoon Session 2026) के पहले दिन ही सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश कर दिया है. मंत्री गौतम टेटवाल ने जब पटल पर बिल रखा तो विपक्षी दल की ओर से जमकर हंगामा किया गया. बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोमवार को ही कैबिनेट बैठक में बिल सदन में पेश करने की मंजूरी दी थी और इसे ऐतिहासिक बताया था.
यूसीसी के अलावा सदन में 13 बिल (कुल 14) पेश किए गए. इनमें धन्वंतरि विश्वविद्यालय विधेयक, अग्निशमक विधेयक, ईंज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक और उपकर संशोधन विधेयक भी शामिल हैं. विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इन बिलों पर विधानसभा में सत्र के दौरान चर्चा की जाएगी. इन बिलों के बारे में अनुपूरक कार्य सूची में जानकारी दी गई थी.

UCC ड्राफ्ट के मुख्य बिंदु
- विवाह और तलाक के नियम समान, तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर लगेगी रोक.
- माता-पिता को बेसहरारा छोड़ने पर एक्शन.
- एक से ज्यादा शादी पर रोक, जीवित जीवनसाथी रहते दूसरा विवाह मान्य नहीं होगा.
शादी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य. - गोद लेने की पारदर्शी प्रक्रिया.
- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को छोड़ने पर गुजारा-भत्ता पाने का अधिकार.
- बेटे-बेटियों, विधवाओं-विधुरों और माता-पिता को विरासत में समान अधिकार मिलेंगे
- लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे वैध, विरासत पाने का मिलेगा हक.
- सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज, आर्य समाज वैदिक विधि और अन्य धार्मिक या पारंपरिक रीति से हुए विवाह मान्य रहेंगे.
- विवाह का पंजीकरण नहीं कराने मात्र से विवाह अवैध नहीं होगा, लेकिन नियम तोड़ने पर जुर्माने और अन्य कार्रवाई का प्रावधान.
- गलत जानकारी देकर विवाह पंजीकरण कराने, रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने या रजिस्टर नष्ट करने पर दंड का प्रावधान.
- सरकारी और निजी नियोक्ता कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति में बदलाव तभी दर्ज करेंगे, जब विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाएगा.
- बल, धोखाधड़ी, पहचान छिपाकर या वैवाहिक स्थिति छिपाकर किया गया विवाह शून्यकरणीय घोषित किया जा सकेगा.
- क्रूरता, व्यभिचार, धर्म परिवर्तन, परित्याग, गंभीर मानसिक विकार और संक्रामक यौन रोग समेत कई आधारों पर तलाक मांगा जा सकेगा.
- विवाह के एक वर्ष के भीतर सामान्य स्थिति में तलाक की अर्जी दाखिल नहीं होगी. असाधारण कठिनाई या गंभीर अनैतिकता में अदालत छूट दे सकेगी.
- पति-पत्नी आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद मांग सकेंगे. अदालत सुलह की संभावना समाप्त होने पर तलाक की डिक्री दे सकेगी.
- शून्य या शून्यकरणीय विवाह से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा.
- तलाक के बाद दोनों पक्षों को पुनर्विवाह का अधिकार. अपील की अवधि पूरी होने या अपील खारिज होने के बाद पुनर्विवाह किया जा सकेगा.
- अदालत पति या पत्नी के परित्याग पर दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना का आदेश दे सकेगी.
- विवाह, तलाक और विवाह की अकृतता से संबंधित मामलों के पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त होंगे.
- रजिस्ट्रार के फैसले के खिलाफ अपील का प्रावधान. पंजीकरण रद्द करने से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना होगा.
- विवाह पंजीकरण के लिए झूठा बयान देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत सजा होगी.
- विधेयक का उद्देश्य धार्मिक विवाह पद्धतियों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उनके कानूनी प्रभावों के लिए समान व्यवस्था बनाना बताया गया है.
- यूसीसी से आदिवासी समाज को बाहर रखा गया.
- लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी (क्लिक कर यहां समझें)
निकाह हलाला को अपराध की श्रेणी में लाने का प्रस्ताव
ड्राफ्ट में निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध में श्रेणी में लाने का प्रस्ताव है. साथ ही, इसमें यह भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति किसी प्रॉपर्टी के मालिक की हत्या का दोषी पाया जाता है, तो वह उस व्यक्ति की संपत्ति का वारिस नहीं बन पाएगा.
SC की पूर्व जज की अध्यक्षता में तैयार किया ड्राफ्ट
यूसीसी बिल का ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है. इस समिति का गठन 27 अप्रैल, 2026 को किया गया था. मुख्यमंत्री के मुताबिक, समिति ने अलग-अलग राज्यों के कानूनी मॉडलों का अध्ययन किया और अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले बातचीत और एक खास वेब पोर्टल के जरिए 10 लाख से ज्यादा लोगों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं हासिल कीं.
कांग्रेस ने किया विरोध
सदन में कांग्रेस ने सभी विधेयक पेश करने का विरोध किया. विपक्ष ने कहा कि यह कार्यसूची में नहीं था और फिर, बिलों को पेश करने की अनुमति कब दी गई. वहीं, कांग्रेस ने यूसीसी पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि अगर मकसद सचमुच एक "समान" नागरिक संहिता बनाना है तो अनुसूचित जनजातियों को इससे क्यों बाहर रखा गया है.
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