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सरकारी स्कूल में पन्नों पर परोसा मिड-डे मील! मैहर से सामने आई शर्मनाक तस्वीर, रिकॉर्ड से जिले का नाम भी लापता

Maihar Mid Day Meal: मध्य प्रदेश के मैहर में गणतंत्र दिवस पर बच्चों को प्लेट की जगह फटे पन्नों पर मिड-डे मील परोसा गया. बजट के बावजूद हुई इस लापरवाही और सरकारी डेटा से जिले का नाम गायब होने पर उठे गंभीर सवाल.

सरकारी स्कूल में पन्नों पर परोसा मिड-डे मील! मैहर से सामने आई शर्मनाक तस्वीर, रिकॉर्ड से जिले का नाम भी लापता

Maihar Mid Day Meal Controversy: मध्य प्रदेश के मैहर से आई एक तस्वीर ने सूबे के प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं.जिस दिन पूरा देश संविधान और नागरिक अधिकारों का उत्सव मना रहा था,उसी दिन मैहर के भटगांव में सरकारी स्कूल के बच्चों को फटी हुई कॉपियों के पन्नों पर मिड-डे मील परोसा जा रहा था. शर्मनाक बात सिर्फ इस पूरी घटना का वायरल वीडियो नहीं है, बल्कि सिस्टम की वो 'अंधेरी सुरंग'है जिसमें मैहर जिला ही गायब है. प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) के सरकारी डैशबोर्ड पर 26 जनवरी को प्रदेश के 52 जिले तो दिख रहे हैं, लेकिन नए बने मैहर जिले का नामोनिशान तक नहीं है. यानी जिस दिन मैहर के बच्चे गंदगी और स्याही लगे कागजों पर खाना खाने को मजबूर थे, सरकारी रिकॉर्ड में उस दिन मैहर के अस्तित्व को ही दर्ज नहीं किया गया.

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बजट डकार गया सिस्टम, बच्चों के हिस्से आई स्याही

 मैहर ब्लॉक के भटगांव से वायरल हुए वीडियो ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है. सरकारी नियमों के अनुसार गणतंत्र दिवस पर बच्चों को पूरी-हलवा देने का आदेश था और इसके लिए छात्र संख्या के मान से प्लेट और बर्तन खरीदने की राशि बहुत पहले जारी की जा चुकी थी. इसके बावजूद भटगांव के स्कूल में बच्चों को जमीन पर बिठाकर पुराने नोटबुक और किताबों के फटे पन्ने बिछा दिए गए. सवाल यह है कि जब प्लेट का पैसा सरकारी खजाने से निकल चुका था, तो बच्चों के सामने प्लेट की जगह फटे पन्ने क्यों थे? क्या वह बजट अधिकारियों और ठेकेदारों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?

जहर परोस रहा प्रशासन, डॉक्टरों की चेतावनी 

यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत के साथ किया गया अपराध है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रिंटिंग इंक में मौजूद सीसा (Lead) और खतरनाक रसायन बच्चों के शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं. खासकर गर्म हलवा जब इन स्याही वाले कागजों पर डाला गया, तो वह रसायन सीधे बच्चों के पेट में पहुंच गया. बच्चों के हाथ में जो पन्ने भविष्य गढ़ने के लिए होने चाहिए थे, उन्हीं पन्नों पर उन्हें धूल और गंदगी के बीच भोजन परोसकर सिस्टम ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया है.

आंकड़ों की बाजीगरी और गायब होते स्कूल 

मध्य प्रदेश में दावों और हकीकत का अंतर PM POSHAN के डेटा से भी साफ हो जाता है. प्रदेश में अब 55 जिले हैं, लेकिन विभागीय डेटा आज भी पुराने 52 जिलों के ढर्रे पर चल रहा है. 26 जनवरी के दिन प्रदेश के 88,281 स्कूलों में से करीब 22 हजार स्कूलों ने भोजन का कोई डेटा ही अपडेट नहीं किया. मैहर जैसे जिलों का रिकॉर्ड में न होना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए 'नो डेटा' (No Data) की नीति अपनाई जा रही है. जब जिला ही रिकॉर्ड में नहीं होगा, तो वहां की गलतियां पकड़ी ही नहीं जाएंगी.

श्योपुर की शर्मिंदगी से मैहर तक: क्या बदल गया? 

यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में बच्चों की थाली से सम्मान गायब हुआ हो. पिछले साल श्योपुर के विजयपुर में भी इसी तरह फटे कागजों पर खाना परोसा गया था. तब भी जांच और कार्रवाई का ढोंग हुआ था, लेकिन हुल्लपुर से लेकर भटगांव तक कुछ नहीं बदला. 2023 के विधानसभा चुनाव में संतुलित पोषण और टेट्रा पैक दूध देने का वादा करने वाली सरकार अब बच्चों को एक साफ प्लेट तक उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रही है.
अधिकारियों का रटा-रटाया आश्वासन मामले के तूल पकड़ने पर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) विष्णु त्रिपाठी ने कहा है कि वीडियो उनके संज्ञान में है और BRC को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है. रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर हर बार जांच का पहिया वहीं आकर क्यों रुक जाता है जहां से भ्रष्टाचार शुरू होता है?
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