- उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मार्च में ही तापमान 37-38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और गर्मी बढ़ी है
- मार्च से मई के बीच उत्तर पश्चिम, दक्षिण प्रायद्वीप, पूर्वी तट में लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहेगी
- इस साल पश्चिमी विक्षोभ कमजोर होने के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश कम और धूप तेज रही है
उत्तर भारत के ज्यादातर मैदानी इलाकों में मार्च में ही मई जैसी गर्मी के हालात दिख रहे हैं.दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब-हरियाणा से लेकर राजस्थान तक तापमान 37-38 डिग्री को छूने लगा है. मध्य प्रदेश में इंदौर रीजन से लेकर महाराष्ट्र में मुंबई, विदर्भ और कोंकण तक ऐसे ही हालात बने हैं. चिंता की बात है कि अगले कुछ दिनों में तापमान और चढ़ने की चेतावनी भी मौसम विभाग ने जारी की है. उत्तर पश्चिम भारत, दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में गर्मी बढ़ी है. राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश में कुछ जगहों पर हीटवेव अलर्ट (लू चलने) जारी किया गया है.
मार्च से मई तक कैसा रहेगा मौसम
भारत मौसम विभाग के अनुसार, लू वाले दिनों की संख्या मार्च से मई के दौरान बढ़ने के आसार हैं. मार्च से मई के मौसम के दौरान,पूर्वी और पूर्वी मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप के कई हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी और पश्चिमी मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक लू के दिनों की संभावना है.

Delhi Weather News
1. सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की कमी
फरवरी और मार्च के महीने में हिमालय क्षेत्रों में 'पश्चिमी विक्षोभ' आते रहते हैं. जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इससे बारिश और बर्फबारी देखने को मिलती है. इसके असर से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में हल्की बारिश और ठंडी हवाएं चलती हैं.इस साल सीजन में पश्चिमी विक्षोभ या तो बहुत कमजोर रहे हैं या उनकी दिशा मैदानी इलाकों की ओर ज्यादा नहीं रही है. बारिश न होने से आसमान साफ है और तेज धूप सीधे जमीन को गर्म कर रही है.
2. एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Anti-Cyclonic Circulation)
राजस्थान और गुजरात के ऊपर एक 'एंटी-साइक्लोन' (उल्टे चक्रवात) के हालात बने हुए हैं.इससे भी मौसम में उष्णता बनी हुई है और गर्म हवाओं का जाल सा बन गया है. यह हवा को नीचे की ओर दबाता है, जिससे हवा गर्म हो जाती है. इससे अरब सागर की ठंडी हवाएं उत्तर भारत की ओर नहीं बढ़ पा रही हैं. ये एंटी साइक्लोन की स्थिति थार रेगिस्तान की शुष्क और गर्म हवाओं को दिल्ली, हरियाणा और यूपी की तरफ धकेल रहा है.
3. अल नीनो (El Nino) का असर
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है. जिस साल अल नीनो सक्रिय रहता है, उस साल दुनिया में तापमान औसत से अधिक रहता है. इसका सीधा असर भारत के मॉनसून और गर्मी के चक्र पर पड़ता है. गर्मी का मौसम जल्दी शुरू हो जाता है.
4. अर्बन हीट आइलैंड
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई जैसे बड़े शहरों में कंक्रीट के जंगल और डामर (Asphalt) की सड़कें सूरज की गर्मी को सोख लेती हैं. ये शहरी इलाकों में गर्मी का जाल (Urban Heat Island Effect) सा बना देती है. इसे रात के समय भी ये इमारतें ठंडी नहीं हो पातीं, जिससे शहरों का तापमान गांव-कस्बों के इलाकों की तुलना में 3-5 डिग्री अधिक रहता है.
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