- महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए सप्ताह में दो दिन दक्षिण भारतीय व्यंजन प्रसाद के रूप में परोसे जाएंगे.
- मंगलवार को इडली, सांभर, पोंगल, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी का प्रसाद भक्तों को निःशुल्क मिलेगा.
- शुक्रवार को पुलिहोरा, पायसम, रसम, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी का विशेष दक्षिण भारतीय मेन्यू उपलब्ध होगा.
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब प्रसादी का स्वाद और भी खास होने वाला है. देश के कोने-कोने से बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचने वाले भक्तों की सुविधा और उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने अन्न क्षेत्र के मेन्यू में बड़ा बदलाव किया है. अब सप्ताह में दो दिन श्रद्धालुओं को पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन भी प्रसाद के रूप में परोसे जाएंगे. इस नई व्यवस्था की शुरुआत मंगलवार यानी 28 जुलाई से कर दी है.
अन्न क्षेत्र के मेन्यू में हुआ बदलाव
अब तक महाकाल मंदिर के निःशुल्क अन्न क्षेत्र में श्रद्धालुओं को दाल, चावल, रोटी, मौसमी सब्जी और विशेष अवसरों पर मिठाई प्रसाद के रूप में दी जाती थी. लेकिन मंदिर में देशभर से आने वाले भक्तों की खानपान संबंधी विविधता को देखते हुए मंदिर समिति ने मेन्यू को और विस्तारित करने का फैसला लिया है. इसी के तहत दक्षिण भारतीय व्यंजनों को भी प्रसादी में शामिल किया.
मंगलवार को मिलेगा दक्षिण भारतीय भोजन
नई व्यवस्था के अनुसार हर मंगलवार श्रद्धालुओं को इडली, सांभर, पोंगल, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी परोसी जाएगी. मंगलवार को इस पहल की शुरुआत के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन व्यंजनों का प्रसाद ग्रहण किया. मंदिर समिति का मानना है कि इससे दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को विशेष आत्मीयता का अनुभव होगा.

बाबा के दरबार में नया प्रसाद ग्रहण करते भक्त.
शुक्रवार को परोसे जाएंगे ये खास व्यंजन
मंगलवार के अलावा प्रत्येक शुक्रवार को भी विशेष मेन्यू रखा गया है. इस दिन श्रद्धालुओं को पुलिहोरा (इमली चावल), पायसम, रसम, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी प्रसाद के रूप में दी जाएगी. इस तरह सप्ताह के दो दिन अन्न क्षेत्र में पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्वाद देखने को मिलेगा.
रोजाना 9 हजार श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी
महाकाल मंदिर का निःशुल्क अन्न क्षेत्र श्रद्धालुओं के दान से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन दो शिफ्ट में करीब 9 हजार श्रद्धालु भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन तैयार होने के बाद हर दिन सुबह लगभग 10 बजे सबसे पहले भगवान महाकालेश्वर को भोग लगाया जाता है. इसके बाद यह प्रसादी श्रद्धालुओं के बीच वितरित की जाती है.

महाकाल मंदिर में अन्न क्षेत्र के बाहर लगा नय मेन्यू.
सभी श्रद्धालुओं को मिलेगा अपने स्वाद का अनुभव
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस नई पहल का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को उनके पारंपरिक स्वाद से जोड़ना है. उन्होंने बताया कि मंगलवार और शुक्रवार को विशेष दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे जाएंगे, जिससे अन्न क्षेत्र की सेवा और अधिक समावेशी बनेगी. वहीं श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं को विशेष रूप से फलाहार प्रसाद भी उपलब्ध कराया जाएगा.
भक्ति के साथ स्वाद का भी संगम
महाकाल मंदिर में शुरू की गई यह नई व्यवस्था केवल भोजन में बदलाव नहीं है, बल्कि देश की विविध संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देने की एक पहल भी है. इससे मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने का एक नया अनुभव मिलेगा और बाबा महाकाल की नगरी में उन्हें अपनेपन का एहसास भी होगा.
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